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प्रधानमंत्री मोदी पांच देशों का दौरा कर गुरुवार सुबह भारत लौटने वाले हैं. पीएम आने के बाद महंगाई के मोर्चे पर अहम बैठक करेंगे. लेकिन इस बीच विपक्ष की तरफ सवाल पूछा जा रहा है कि 6 दिनों में 5 देशों के विदेशी दौरे से पीएम मोदी देश के लिए क्या ला रहे हैं? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 देशों की यात्रा पर 15 मई को UAE गए और वहां से वो नीदरलैंड, स्वीडन, नार्वे होते हुए इटली पहुंचे थे. पीएम मोदी और इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी की मुलाकात फिर चर्चा में है.
पीएम मोदी ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की, जिसका वीडियो इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन व्यूज के पार चला गया है. पीएम मोदी और मेलोनी की मुलाकात ने पहली बार सोशल मीडिया पर सुर्खियां नहीं बंटोरी है. इससे पहले जब मेलोनी 3 साल पहले भारत आई थीं, तब भी दोनों की मुलाकात की खासी चर्चा हुई थी. दरअसल, जो इटली कभी चीन की तरफ झुक रहा था, उस इटली की भारत से करीबी का ऐलान खुद प्रधानमंत्री मेलोनी ने की. सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का मेलोनी को दिया गिफ्ट इतनी तेजी से इसलिए वायरल हुआ क्योंकि सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं के नामों को जोड़कर ‘मेलोडी’ यानी Modi और Meloni मतलब ‘Melodi’ शब्द एक बार फिर चर्चा में आ गया.
मेलोनी और मोदी के नामों को जोड़कर लोगों ने मजाकिया और दोस्ताना अंदाज में मेलोडी कहना शुरू कर दिया, जिसे इस तोहफे ने नए सिरे से चर्चित कर दिया. मेलोनी ने भी इसे खुशी के साथ कबूल करके अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ पर वीडियो शेयर कर प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया.
बता दें कि मोदी और मेलोनी की दिसंबर 2023 में दुबई में COP28 समिट में मुलाकात हुई थी. इस मुलाकात की फोटो शेयर करते हुए मेलोनी ने कैप्शन में पहली बार ‘मेलोडी’ लिखा था. G20 और दूसरे अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में दोनों नेताओं की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद ये शब्द इंटरनेट मीम और ट्रेंड बन गया. जिस तरह से दुनिया भर के करोड़ों लोगों ने इस तस्वीर को देखा, उसने भारत और इटली के कूटनीतिक रिश्तों में एक मिठास घोल दी. इस करीबी का असर इटली की प्रधानमंत्री मोदी की भाषा पर भी दिखा.
रोम पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात की बेहद खूबसूरत अंदाज में हुई. दोनों नेता रोम के एक शानदार टेरेस पर मिले, जहां दोनों ने सूर्यास्त के समय यानी ‘गोल्डन ऑवर’ के मनमोहक दृश्य को देखा. इस दौरान मेलोनी प्रधानमंत्री मोदी को रोम के अहम इलाकों के बारे में बता दिखीं. वहीं पीएम मोदी उत्सुकता से सवाल करते नजर आए.
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम मोदी पहली बार इटली द्विपक्षीय वार्ता के लिए पहुंचे, जिनके लिए एक विशेष डिनर का आयोजन किया गया. इस दौरान भारत-इटली सहयोग और ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ जैसे बड़े वैश्विक मुद्दों पर अनौपचारिक चर्चा हुई. डिनर के बाद पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी रोम के ऐतिहासिक स्मारक कोलोसियम का दौरा करने पहुंचे.
दुनिया के सात अजूबों में शामिल इस ऐतिहासिक स्मारक का निर्माण 70-72 ईस्वी के बीच शुरू हुआ था, जिसका उपयोग ग्लेडिएटर की लड़ाइयों और सार्वजनिक तमाशों के लिए किया जाता था. इसके बाद दोनों एक साथ एक ही कार से निकले और दोनों की सेल्फी वायरल हो गई. ऐसी ही एक सेल्फी ऐतिहासिक कोलोसियम के सामने मेलोनी ने ली और और सोशल मीडिया पर लिखा- Welcome to Rome, my friend!
रोम पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने भी इस खूबसूरत मुलाकात की तस्वीरें साझा की. पीएम मोदी ने बताया कि रात के डिनर के बाद दोनों नेताओं ने मशहूर कोलोसियम का दौरा किया और कई वैश्विक विषयों पर चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी का इटली दौरा AI, रक्षा, अंतरिक्ष जैसे तमाम सेक्टर में एक साथ काम करने और रणनीतिक साझेदारी के नए दौर में प्रवेश करने के अलावा इस मेलोडी मोमेंट के लिए भी याद किया जाएगा, जिसमें मोदी और मेलोनी की दोस्ती और केमिस्ट्री का गवाह सारी दुनिया बन रही है.
राहुल गांधी ने पीएम के दौरे पर उठाए सवाल
भारत और इटली ने अपने संबंधों को अपग्रेड करते हुए स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की. राहुल गांधी पीएम मोदी के विदेशी दौरे को लेकर हमलावर हैं. कह रहे हैं कि मोदी सबको बचत का संदेश देकर खुद विदेश चले गए. सवाल ये है कि पीएम मोदी के पांच देशों के दौरे से क्या मिला? इसे समझने के लिए सिर्फ इटली ही काफी है, जिसकी चर्चा भले ही मेलोडी मोमेंट की वजह से हो रही हो लेकिन दोनों देशों में आती मिठास भारत के बहुत काम की है.
गौरतलब है कि ईरान युद्ध की वजह से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दबाव में है. भारत को इस वक्त डॉलर की जरूरत है और वो सिर्फ निर्यात से मिल सकता है. इस लिहाज से इटली भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि इटली यूरोपीय संघ में भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. साल 2025 में दोनों देशों के बीच 1 लाख 60 हजार करोड़ का कारोबार हुआ. भारत इटली को 96045 करोड़ का निर्यात करता है, जो साल 2024 की तुलना में 9.42% ज्यादा है. वहीं इटली से भारत 64 हजार 28 करोड़ का आयात करता है.
दोनों ही देश इस कारोबार को 2029 तक 2 लाख 25 हजार करोड़ रुपये पहुंचाना चाहते हैं, जो अपने आप में बड़ा लक्ष्य है. प्रधानमंत्री का इटली दौरा भारत की निर्यात संभावनाओं को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो सकता है. यही वजह है कि BJP राहुल गांधी के हमलों को उनकी कुंठा करार देती है. नितिन नवीन इटली में पीएम मोदी ने वहां के बड़े कारोबारियों से भी मुलाकात की, जिसमें निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और भारत में नई औद्योगिक पार्टनरशिप पर चर्चा की गई.
सर्विस सेक्टर के लिए भी इटली अहम
सर्विस सेक्टर के लिहाज से इटली भारत के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है. साल 2025 में सेवाओं का व्यापार करीब 15 हजार करोड़ रुपये हुआ जो 2024 की तुलना में 19.94% ज्यादा है. इटली में रहने वाले भारतीयों ने साल 2025 में 6672 करोड़ रुपये भेजे जो पिछले साल के मुकाबले 32.8% से ज्यादा है. अगर बात भारत में इटली के FDI की करें तो अप्रैल 2000-सितंबर 2025 के बीच इटली 19वें स्थान पर रहा, जिसका 41 हजार करोड़ रुपये का निवेश है, जिसमें सबसे ज्यादा 29.8% ऑटोमोबाइल 17.1% ट्रेडिंग और 5.6% औद्योगिक मशीनरी में निवेश है.
इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिहाज से भी इटली काफी अहम है. भारत और इटली इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने और व्यापार-कनेक्टिविटी मजबूत करना चाहते हैं जिससे भारत खाड़ी देशों के जरिए यूरोप से जुड़ जाएगा. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का इटली दौरे को भले ही एक तस्वीर तक सीमित करने की कोशिश की जाए लेकिन हकीकत ये है कि भारत को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिहाज से इटली की अहमियत बहुत ज्यादा है.
पाकिस्तान और इटली के बीच रक्षा संबंध काफी गहरे हैं. पाकिस्तान अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए इटली से भारी मात्रा में हथियार खरीदता है. भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इटली के अपने समकक्ष गुइडो क्रोसेटो से पाकिस्तान को हथियार बेचना बंद करने के लिए कहा था. बड़ी बात ये है कि भारत और इटली ने अपनी इस करीबी को रक्षा क्षेत्र में भी बढ़ाने का फैसला किया है. दोनों देश मिलकर रक्षा क्षेत्र में भी काम करने की तैयारी कर रहे हैं. सीमा पार आतंकवाद को लेकर भी भारत को इटली का साथ मिला है.
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