मैं भूखी क्यों रहूं? अमेरिका में रह रही इंडियन महिला की आपबीती… जब ऑफिस में नहीं मिला वेज खाना – आज तक

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अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय महिला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर अपने ऑफिस की एक कहानी साझा की है. इस कहानी के माध्यम से उन्होंने एक ऐसे मुद्दे को छूने की कोशिश की है, जो आज बहुत सारे लोगों के लिए समस्या बनती जा रही है. 
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर @thewickedvegetarian नाम के हैंडल से एक वीडियो शेयर किया है. इसका वीडियो के साथ उन्होंने एक लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा है. पोस्ट में उन्होंने साफ कर दिया है कि वो जो भी किस्सा वीडियो में बता रही हैं, वो सिर्फ उनके ऑफिस की एक घटना भर नहीं है, बल्कि वो शाकाहारी लोगों के प्रति एक आम नजरिए की है. 
महिला ने पोस्ट लिखकर और वीडियो बनाकर निकाली भड़ास
उन्होंने पोस्ट में लिखा है –  यह कल के बारे में नहीं है, बल्कि शाकाहारी होने और कभी भी उसके बुनियादी विकल्प न होने के बारे में है. मुझे कितनी बार सुनना पड़ा है…ओह तो आप शाकाहारी हैं, इसलिए चिकन और मछली ठीक है. इसके अलावा अगर आप मांस खाते हैं… आप हमारे शाकाहारी खाने का विकल्प बंद कर दें! क्या होगा अगर सब जगह बेसलाइन शाकाहारी दिया जाए और मांस को साइड में जोड़ा जाए? समस्या हल हो गई! मैं ऑफिस लंच से इतनी निराश होकर बाहर निकली कि उन्हें बुरा लगा और उन्होंने एक घंटे बाद मेरे लिए कुछ मंगाने की पेशकश की, लेकिन तब तक मैंने अपने लिए दोपहर का भोजन ऑर्डर कर लिया था क्योंकि मैं बहुत भूखी थी.
सोशल मीडिया ग्रैब

यहां देखें वीडियो 
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का नाम  रुनझुन मिश्रा है, जिन्हें ‘द विकेड वेजिटेरियन’ के नाम से जाना जाता है. रुनझुन ने वीडियो में अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर आप कभी किसी कार्यक्रम में पर भूखे रह गए हों, तो अपना हाथ उठाएं.  रुनझुन ने उस पल को याद करते हुए बताया कि कैसे खानपान से जुड़े कार्यक्रमों में शाकाहारियों को नजरअंदाज किया जाता है. खासकर के वैसी जगहों पर जहां हर किसी के लिए भोजन मुहैया कराने का वादा किया गया हो. उन्होंने बताया कि उनके ऑफिस में कहा गया था कि लंच नहीं लाना है वो ऑफिस की तरफ से मिलेगा. सभी कर्मचारियों के लिए भोजन की व्यवस्था का वादा किया गया था. 
ऑफिस लंच में नहीं था शाकाहारी भोजन का ऑप्शन
वीडियो में आगे उन्होंने कहा कि जब ऑफिस में लंच का टाइम हुआ तो सभी लोगों के लिए खाना आया. मैं बहुत उत्साहित थी. जब वह वहां पहुंची तो  60 से ज़्यादा सैंडविच देखे, जिनमें हलाल, कोशेर और ग्लूटेन-मुक्त सभी तरह के विकल्प मौजूद थे. लेकिन जब मैंने शाकाहारी सैंडविच मांगा तो वहां सन्नाटा फैल गया. वहां कैटरर्स ने शाकाहारियों के लिए भोजन का कोई विकल्प नहीं रखा था. 
लोगों ने मुझे सैंडविच से मीट हटाकर उसे खाने की दी सलाह
चुप्पी को तोड़ते हुए किसी ने मुझे सलाह दी कि मैं खुद शाकाहारी सैंडविच बना सकती हूं और उनका मतलब वही था जो वे हमेशा से लोग मुझ जैसे शाकाहारी से कहते आए हैं- आप एक मीट सैंडविच ले सकते हैं और उस सैंडविच में डाले गए मांस की सभी परतों को सावधानीपूर्वक हटाकर उसे शाकाहारी बना सकते हैं. रुनझुन ने कहा कि यही कारण है कि मुझे शाकाहारी सैंडविच खाने की इच्छा नहीं होती. इससे मुझे उल्टी आने लगती है.
महिला ने उठाए सवाल
इसके बाद रुनझुन ने सवाल उठाए कि आखिर क्यों शाकाहारियों को नजरअंदाज किया जाता है. क्यों उनके लिए सामूहिक जगह पर खाने के विकल्प नहीं होते हैं. उन्होंने अपने कैप्शन में भी इसका जिक्र किया कि इसके बाद वो वहां से भूखे निकल गईं और अपने लिए अलग से ऑर्डर किया. 
कई लोगों दी अपनी प्रतिक्रियाएं
इस पोस्ट पर कई सारे लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है. एक यूजर ने लिखा है कि कॉरपोरेट इवेंट में कुछ लोग वेज सैंडविच भी रखते हैं, लेकिन उसे भी नॉनवेज खाने वाले लोग ले लेते हैं और शाकाहारियों के लिए कुछ नहीं बचता है. एक यूजर ने कहा कि शाकाहारियों को पहली प्राथमिकता मिलनी चाहिए और मीट और चीज अलग से एड होनी चाहिए. एक अन्य यूजर ने लिखा है कि मेरे ऑफिस में हमेशा मेरे लिए वेज सैंडविच आता था, लेकिन मेरे सहकर्मी मुझसे पहले उसे उठा लेते थे और फेंक देते थे. 
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