मॉम ने डांटा और वो घर छोडक़र चल दिए – Inext Live

मेरठ ब्यूरो। घर, जहां बच्चों को सबसे ज्यादा सुकून और सुरक्षा महसूस होनी चाहिए, वही जगह उनके लिए तनाव और असहजता का कारण बन जाती है। पेरेंट्स की डांट-फटकार और स्ट्रिक्ट पेरेंटिंग बच्चों के मासूम मन पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। कई बच्चे इन परिस्थितियों से परेशान होकर घर छोडऩे या गलत रास्ते पर कदम रखने को मजबूर हो रहे हैं। बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट इसकी तस्दीक करती है। एक्सपट्र्स का कहना है कि संवाद की कमी, सहानुभूति का अभाव और भावनात्मक समर्थन न मिलना भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
ये है रिपोर्ट
बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में जनवरी से अब तक पांच सौ से अधिक बच्चे खोए-पाया श्रेणी में पाए गए। पुलिस एफआईआर के आधार पर इन्हें ढूंढा गया। इनमें 10 प्रतिशत बच्चे ऐसे मिले जो पेरेंट्स की डांट-फटकार से नाराज होकर भाग गए थे। इन बच्चों की काउंसलिंग के दौरान सामने आया कि मां या पिता की डांट ने उनकी मेंटल हेल्थ खराब हो रही थी। इनमें सभी की उम्र 8 से 15 वर्ष की पाई गई।
दो प्रतिशत बने अपराधी
रिपोर्ट के अुनसार ऐसे बच्चे जो लगातार घर में गालियों, मारपीट या किसी भी फ्रस्ट्रेशन के शिकार हो रहे थे। उनमें दो प्रतिशत बच्चों ने अपराध की दुनिया में कदम रख लिया। ये बच्चे कई महीने या साल से घर से बाहर थे। ये बच्चे छोटी-मोटी चोरी, मारपीट, छीना झपटी जैसे अपराध कर रहे थे।
ये हैं वजह
एक्सपटर्स बताते हैं कि बार-बार की डांट बच्चों के आत्मविश्वास को कमजोर करती है। वे अपनी योग्यता पर शक करने लगते हैं।खुद को दूसरों से कमतर मानते हैं। पेरेंट्स से उन्हें इमोशनल सपोर्ट नहीं मिल पाता है। वे अपने आप को अकेला महसूस करने लगते हैं। यह असुरक्षा उन्हें घर से भागने या बुरी संगत में जाने के लिए प्रेरित करती है। डांट और दबाव के कारण बच्चों में गुस्से की भावना बढ़ जाती है, जो उन्हें गलत फैसले लेने की ओर धकेलती है।
ये हैं समाधान
– बच्चों से खुलकर बात करें और उनके विचारों को समझने की कोशिश करें।
-डांट की जगह समझदारी से समझाएं।
-बच्चों की भावनाओं को महत्व दें।
-बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों की भी सराहना करें।
-यदि बच्चे के व्यवहार में बदलाव दिखाई दे, तो मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की मदद लें।
इनका है कहना
पहले पेरेंट्स की नसीहत या डांट फटकार भी बच्चों के लिए सीख होती थी। अब माहौल बदल गया है। पेरेंट्स की डांट से घर छोडक़र जाने वाले बच्चों के मामले काफी बढ़ रहे हैं। ये काफी चिंताजनक है।
पूनम शर्मा, मेंबर, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी
पेरेंट्स का कठोर व्यवहार बच्चों में विद्रोही प्रवृत्ति को जन्म देता है। गुस्से और निराशा के कारण वह गलत रास्ते पर चले जाते हैं। ऐसे ही बच्चे चोरी, नशा और गैंग गतिविधियों में शामिल होते हैं।
अनीता राणा, फाउंडर, जनहित फाउंडेशन

घर छोडऩे वाले अधिकांश बच्चे उन घरों से आते हैं, जहां संवाद की कमी और कठोर अनुशासन का माहौल है।बिना किसी योजना के नाराज होकर अचानक घर छोड़ देते हैं और अपराध के शिकार बन जाते हैं।
डा। विभा नागर, क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट
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