नीदरलैंड से भारत लौटाए गए ऐतिहासिक ताम्रपत्र को लेकर अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर अयोध्या के निर्माणाधीन अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि विदेशों से भारतीय धरोहरों और पुरा अवशेषों का वापस आना इस बात का संकेत है कि आज भारत को विश्व एक मजबूत वैश्विक, सामरिक और आर्थिक शक्ति के रूप में देख रहा है.
डॉ. संजीव कुमार सिंह ने कहा कि पहले भारत की वैश्विक स्थिति इतनी प्रभावी नहीं थी. लेकिन, अब दुनिया भारत की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान के साथ लौटाने के लिए आगे आ रही है. उन्होंने कहा कि नीदरलैंड से लौटा ताम्रपत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति बढ़ते वैश्विक सम्मान का प्रतीक है.
अयोध्या का अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय वर्तमान में एक विशेष प्रकल्प चला रहा है. जिसके तहत विश्वभर में मौजूद भगवान राम, रामायण, रामकथा और राम संस्कृति से जुड़ी पांडुलिपियों एवं कलाकृतियों को चिन्हित और संग्रहित करने का प्रयास किया जा रहा है.
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डॉ. सिंह ने कहा कि हालांकि नीदरलैंड से लौटे ताम्रपत्र का सीधा संबंध रामकथा से नहीं है, लेकिन इससे उन भारतीय धरोहरों को वापस लाने की प्रक्रिया को नई गति मिलेगी, जो वर्षों पहले विदेशों में पहुंच गई थीं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ब्रिटेन के संग्रहालयों में आज भी अकबर के समय में चलाए गए ‘राम-सिया’ प्रकार के सिक्के और रामचरितमानस के फारसी अनुवाद सुरक्षित हैं.
डॉ सिंह ने बताया कि हाल ही में ऑस्ट्रेलिया से भी 14 ऐतिहासिक वस्तुएं भारत लौटी हैं, जिनका संरक्षण राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली में किया जा रहा है. वहीं नटराज की प्रतिमा सहित कई महत्वपूर्ण पुरावशेष भी विदेशों से वापस भारत लाए जा चुके हैं.
अब तक करीब 400 से 500 भारतीय पुरावशेष विदेशों से वापस भारत लाए जा चुके हैं और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इस दिशा में विशेष तेजी देखने को मिली है. उन्होंने इसे भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता के लिए बेहद सराहनीय कदम बताया.
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शिवेंद्र द्विवेदी एबीपी न्यूज़ से अयोध्या से जुड़े हैं. चार वर्षों के अनुभव के साथ धार्मिक, समाज और प्रशासन की खबरों पर खास नजर रखते हैं.
Source: IOCL
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