मोदी सरकार के लिखित वादे से पिघला DMK का दिल? समझें महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का नया गणित – Hindustan

लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और 2029 से महिला आरक्षण कानून लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर मोदी सरकार के लिए राहत भरी खबर है। विपक्ष के अहम सहयोगी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) इस अहम बिल पर अपने पिछले रुख से पीछे हटते दिख रहे हैं। बंगाल चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत और शिवसेना (UBT) में टूट के बाद सरकार के पक्ष में सियासी माहौल मजबूत होता नजर आ रहा है।
पिछले सत्र में इस बिल पर चर्चा के दौरान, सरकार ने DMK को यह आश्वासन देकर मनाने की कोशिश की थी कि लोकसभा में सभी राज्यों के प्रतिनिधित्व में 50% की वृद्धि की जाएगी। गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले सत्र में जो बात मौखिक रूप से कही थी, माना जा रहा है कि सरकार अब उस वादे को बिल के ड्राफ्ट में लिखित रूप से शामिल कर सकती है ताकि हिचकिचा रहे दलों को भरोसा दिलाया जा सके। शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) के पास 8 सांसद हैं, और उनकी तरफ से भी बिल पर अपना स्टैंड बदलने के संकेत मिले हैं। इसके साथ ही, राज्यसभा में भी सरकार के लिए संख्या बल काफी सकारात्मक नजर आ रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया गठबंधन के फैसले के खिलाफ जाने पर जब कांग्रेस ने DMK को नसीहत दी, तो द्रविड़ पार्टी के सूत्रों ने कांग्रेस पर ही गठबंधन धर्म तोड़ने का आरोप लगा दिया। DMK के एक सूत्र ने कहा, “कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन को बर्बाद किया है। उन्होंने हमारे समर्थन से विधानसभा में पांच सीटें जीतने के बाद विजय के नेतृत्व वाली TVK पार्टी के साथ गठबंधन करके DMK को धोखा दिया है। इसलिए उन्हें हमें उपदेश देना बंद कर देना चाहिए।”
DMK ने साफ किया है कि भले ही वह अपनी चिंताओं को दूर करने वाले परिसीमन योजना का समर्थन करने को तैयार है, लेकिन वह पिछली बार की तरह कांग्रेस के रुख का आंख मूंदकर पालन बिल्कुल नहीं करेगी। पार्टी सूत्रों ने 1997 का जिक्र करते हुए कहा, “कांग्रेस का इतिहास अपने सहयोगियों को धोखा देने का रहा है। उन्होंने पूर्व पीएम राजीव गांधी के हत्यारों से मिलीभगत का बेबुनियाद आरोप लगाकर आईके गुजराल सरकार से समर्थन वापस लिया और मामूली सी बात पर यूनाइटेड फ्रंट को तबाह कर दिया था।”
सरकार ने फिलहाल इस बिल को दोबारा लाने की कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। हालांकि, शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सदन में जरूरी संख्या बल सुनिश्चित होते ही इसे फिर से पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि अप्रैल में इस बिल को 298 सांसदों का समर्थन हासिल हुआ था।
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