म्यांमार में बढ़ा अराकान आर्मी का दबदबा, भारत के लिए नॉर्थ ईस्ट में कैसे खड़ी हुई बड़ी दिक्कत? – Zee Hindustan

Myanmar: भारत और म्यांमार का बॉर्डर 1,643km लंबा है. म्यांमार की ओर से इस बॉर्डर का पूरा कंट्रोल आर्मी से हटकर जातीय सशस्त्र समूहों के पास चला गया है. इस बदलाव का साफ अर्थ है कि भारत को अब इन समूहों से जुड़ना होगा, जो सीमा पर कंट्रोल रखते हैं.
नई दिल्ली: Myanmar: म्यांमार में गृहयुद्ध जारी है. इस बीच अब थ्री अलायंस ब्रदरहुड के एक विद्रोही गुट अराकान आर्मी की ओर से राखीन प्रांत पर कब्जा कर लिया गया है. यहां का 271km लंबा बॉर्डर बांग्लादेश के साथ सटा हुआ है. ऐसे में  कहा जा सकता है कि अराकान आर्मी ने पूरी तरह से एक अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर पर अपना कंट्रोल स्थापित कर लिया है. यह म्यांमार की सेना जुंटा के लिए बेहद बड़ा झटका साबित हो सकता है. म्यांमार में अराकान आर्मी के उदय से भारत-बांग्लादेश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा खड़ा हो गया है. 
भारत-बांग्लादेश की बढ़ी सिरदर्दी 
बांग्लादेश पहले से ही अपने देश में घुस रहे रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर परेशान है. वहीं भारत को इस बात की चिंता है कि म्यांमार के बिगड़े हालात देश के उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं. बता दें कि अराकान आर्मी ने भारत के बॉर्डर से सटे कई क्षेत्रों में भी अपना कब्जा लिया है. ऐसे में वे इस क्षेत्र में रहने वाले अपने विरोधी गुटों पर निशाना साध रहे हैं, जिससे सीमा के पास वाले इलाकों की शांति में भंग डल रहा है. 
भारत की क्यों बढ़ी चिंता? 
भारत और म्यांमार का बॉर्डर 1,643km लंबा है. म्यांमार की ओर से इस बॉर्डर का पूरा कंट्रोल आर्मी से हटकर जातीय सशस्त्र समूहों के पास चला गया है. इस बदलाव का साफ अर्थ है कि भारत को अब इन समूहों से जुड़ना होगा, जो सीमा पर कंट्रोल रखते हैं. इनमें काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA), चिन नेशनल फ्रंट (CNF), नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट (NUG) और अराकान आर्मी (AA) शामिल हैं. भारत का इन समूहों के साथ बेहद ही सीमित संपर्क रहा है क्योंकि ये समूह हमेशा से म्यांमार की सेना का विरोध करते हैं. वहीं अब इन हालातों को देखते हुए भारत को इन समूहों से बातचीत करनी पड़ सकती है. 
भारत के लिए क्या है सबसे बड़ा खतरा?  
बॉर्डर पर अराकान आर्मी के उदय ने भारत के लिए नई चिंता खड़ी कर दी है. इससे भारत की सुरक्षा पर भी खतरा खड़ा हो गया है. दरअसल अराकान आर्मी में जातीय बौद्ध ज्यादा मात्रा में है. ये खुद को रोहिंग्यो विरोधी विद्रोही गुट के रूप में स्थापित कर चुके हैं. ऐसे में भारत के सीमावर्ती इलाकों में इनके कब्जे से रोहिंग्या के घुसपैठ करने का खतरा अधिक बढ़ गया है. रोहिंग्या वैसे ही अवैध रूप से भारत-बांग्लादेश के बॉर्डर में घुस रहे हैं. उन्हें वापस भेजना सिरदर्दी साबित हो रहा है. समस्या ये है कि अवैध रूप से घुसे रोहिंग्यओं को अब किसके हवाले किया जाए.  
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