सागा ग्रुप बनाकर 7 सोसाइटी के माध्यम से देश भर के 16 राज्यों में 10 हजार करोड़ की ठगी करने वाले मास्टरमाइंड समीर पर दो देशों की सरकारें मेहरबान हैं। समीर इस समय दुबई में रह रहा है। उसके पास अब तक सेंट किट्स एंड नेविस की नागरिकता थी। अब उसे संयुक्त अरब
कानून के जानकारों का कहना है कि समीर ने यूएई सरकार को अंधेरे में रखकर नागरिकता ली होगी, क्योंकि यूएई में दोहरी नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है। समीर के पास भारत की नागरिकता भी है। वहीं भारत सरकार भी समीर पर मेहरबानी दिखा रही है।
दरअसल, समीर के फर्जीवाड़े का केस एमपी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट, भारत सरकार से उसके ग्रुप और सोसाइटियों की जानकारी देने के लिए कई बार कह चुका है, मगर सरकार की तरफ से कोर्ट में कोई जवाब नहीं दिया जा रहा।
दैनिक भास्कर ने इस खबर के पार्ट-1 और पार्ट-2 में बताया कि किस तरह से समीर ने सागा ग्रुप के जरिए ठगी का नेटवर्क तैयार किया और सटोरिए से ग्रुप का सीएमडी बना। अब तीसरे और आखिरी पार्ट में पढ़िए एमपी हाईकोर्ट में कौन सा मामला तीन साल से लंबित है और किस तरह से भारत सरकार की लापरवाही हजारों निवेशकों पर भारी पड़ी है।
अब जानिए वो वाकया जिसके बाद समीर विदेश चला गया समीर सागा ग्रुप की हर सालगिरह पर आलीशान होटल में भव्य कार्यक्रम का आयोजन करता था। सागा ग्रुप की 10वीं सालगिरह पर भी उसने कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें फिल्मी सितारों को भी बुलाया था। ये साल 2018 की बात है। सागा ग्रुप की सातों सोसाइटियों की लुभावनी स्कीम्स को देखकर लोग निवेश कर रहे थे।
साल 2019 में उसे पहला झटका लगा। उसकी एक सोसाइटी श्री स्वामी विवेकानंद मल्टी स्टेट क्रेडिट को–ऑपरेटिव सोसाइटी के कामकाज पर सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने रोक लगा दी। इसी के बाद समीर अग्रवाल मुंबई से दुबई शिफ्ट हो गया।
सागा ग्रुप की सोसाइटी के खिलाफ 2020 में पहली एफआईआर उसे दूसरा झटका तब लगा जब भोपाल के पिपलानी थाने में साल 2020 में इसी सोसाइटी के खिलाफ अंकित मालवीय ने शिकायत की। मालवीय ने अपनी शिकायत में कहा कि सोसाइटी के जरिए उसे पैसे दोगुने करने का लालच दिया था।
पुलिस ने समीर अग्रवाल समेत सोसाइटी अध्यक्ष चंदन गुप्ता, आरके शेट्टी, एमपी हेड रविशंकर तिवारी उसके भाई विनोद तिवारी और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने विनोद तिवारी, शशांक श्रीवास्तव और अंगद कुशवाह को गिरफ्तार किया और विवेकानंद सोसाइटी की सभी ब्रांच पर ताला लगा दिया था।
सागा ग्रुप की किसी सोसाइटी के खिलाफ ये पहली एफआईआर थी। इस मामले में फरियादी से समझौता करने के लिए समीर अग्रवाल भारत आया था। भास्कर से बात करते हुए मामले के फरियादी अंकित मालवीय ने कहा कि सोसाइटी ने मेरे सहित कई निवेशकों के पैसे लौटा दिए थे। इस वजह से शिकायत वापस ले ली थी।
सागर में दर्ज FIR को भी रफा दफा कराया भोपाल के पिपलानी की तरह सागर के रहली थाने में 15 सितंबर को पुष्पेंद्र राठौर ने अशोक राज, संजय मिश्रा और सुषमा मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पुष्पेंद्र ने शिकायत में बताया था कि वह 2022 में कंपनी से एजेंट के तौर पर जुड़ा था। उसने लोगों से 14 लाख रुपए जमा कराए थे।
साल 2023 में 35 लोगों की मैच्योरिटी पूरी हुई, तो उसने भुगतान के लिए ब्रांच से संपर्क किया। ब्रांच के लोग कुछ समय तक अलग–अलग बहाने बनाते रहे। फिर कहा गया कि मकरोनिया में इस ब्रांच को मर्ज कर दिया गया है, वहां से भुगतान होगा। किसी तरह 5 लाख रुपए के लगभग भुगतान किया गया। 10 लाख नहीं किया गया।
पुलिस ने इस मामले में बीएनएस की धारा में प्रकरण दर्ज किया। रहली पुलिस ने इस मामले में 9 नवंबर को ब्रांच मैनेजर अशोक राज को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद आरोपी की ओर से शिकायतकर्ता से समझौता कर लिया गया। दैनिक भास्कर को शिकायतकर्ता पुष्पेंद्र राठौर ने बताया कि उसके द्वारा कराए गए निवेश की राशि लौटा दी गई है। इसकी वजह से उसने शिकायत वापस ले ली।
साल 2021 में हाईकोर्ट में सागा ग्रुप के खिलाफ जनहित याचिका सागा ग्रुप के एफआईआर रफा दफा करवाने के बाद भोपाल के समाजसेवी सौरभ गुप्ता की ओर से साल 2021 में एक जनहित याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता की तरफ से कोर्ट में बताया गया कि कंपनी पर कार्रवाई नहीं हुई तो देश भर के लाखों निवेशकों का पैसा डूब जाएगा।
हाईकोर्ट ने भारत सरकार और प्रदेश सरकार से सागा ग्रुप कंपनी के लोगों के बारे में जानकारी मांगी लेकिन अब तक जवाब पेश नहीं हुआ। कोर्ट में याचिकाकर्ता की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील रविंद्र गुप्ता कहते हैं कि 8 नवंबर 2021 को राज्य के महाधिवक्ता ने जवाब देने के लिए समय मांगा।
दो साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है लेकिन जवाब अब तक पेश नहीं किया। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2025 में होना है।
समीर के पास संयुक्त अरब अमीरात की नागरिकता समीर ने अबुधाबी में रियल एस्टेट में निवेश किया है। इसी के बदौलत उसने 28 नवंबर 2023 को संयुक्त अरब अमीरात की नागरिकता ली। जानकारों के मुताबिक अमीरात एक टैक्स हैवन कंट्री है यानी करदाताओं के लिए स्वर्ग है। यहां इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता। साथ ही कमाई और निवेश को लेकर ज्यादा पूछताछ नहीं होती।
यूएई ने उसे एक साल के लिए नागरिकता दी थी। 27 नवंबर 2024 को इसकी वैधता खत्म हो चुकी है। जानकारों के मुताबिक यूएई की नागरिकता नियम की पहली शर्त है कि वह किसी को भी दोहरी नागरिकता नहीं दे सकता है। एक देश की नागरिकता छोड़ने के बाद ही कोई व्यक्ति वहां की नागरिकता ले सकता है।
समीर ने नागरिकता हासिल करने के लिए या तो दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया होगा या फिर किसी और तरीके से नागरिकता हासिल की है। ये भी पता चला है कि वहां उसने दुबई के एक शेख के पार्टनरशिप में हाई एंड सिटी मैनेजमेंट सर्विस एलएलसी नाम की कंपनी बनाई है।
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