यूसीसी की जनसुनवाई: धर्म गुरु एकमत लिवइन पर कानून बने, बहु-पत्नी व शरिया पर भिड़े – Dainik Bhaskar

राजस्थान में समान नागरिक संहिता-2026 (यूसीसी) को लागू करने की दिशा में जयपुर संभाग में कानून का मसौदा तैयार करने के लिए शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में एक संभाग स्तरीय जनसुनवाई हुई। यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में बैठक में जमकर हंगामा, तीखी बहस और दावों-प्रतिदावों का दौर चला।
पहले सत्र में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि, धर्मगुरु, निर्वाचित जनप्रतिनिधि, अधिवक्ता, शिक्षाविद और सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए, जिन्होंने यूसीसी के प्रस्तावित प्रावधानों पर राय रखी। सभी धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के रजिस्ट्रेशन का समर्थन किया। उनका कहना था कि ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
शरिया कानून बनाम एक देश-एक विधान
बैठक के दौरान शरिया कानून और समान नागरिक संहिता को लेकर भी तीखी बहस हुई। हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य ने बहुविवाह, हलाला, दहेज और शादियों में फिजूलखर्ची जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष के कुछ लोगों की बातें सुनकर मैं हैरान हूं। क्या कुछ लोग देश में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। जब पूरी दुनिया आगे बढ़ रही है, तब ये चाहते हैं कि कोई चार प|ियां रखे। एक प|ी से कई-कई बच्चे पैदा करने वाली मानसिकता का समर्थन नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि जिस तरह हिंदू समाज में मृत्युभोज जैसी कुप्रथा पर कानून बना, उसी तरह अन्य सामाजिक कुरीतियों पर भी कानून बनने चाहिए।
पूछे जा रहे 19 सवाल: संभागीय आयुक्त वी.सरवन ने बताया कि कमेटी ने जनता से रायशुमारी के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल (ucc.rajasthan.gov.in) लाइव किया है, जहां नागरिकों से 19 प्रमुख सवाल पूछे जा रहे हैं, जिनका जवाब ‘हां’ या ‘ना’ में देना है। 11 जुलाई: सुबह 10 से दोपहर 12:30 बजे तक जयपुर के शेष नागरिकों और संगठनों के लिए कमेटी की सदस्य डॉ. शुचि चौहान की मौजूदगी में जनसुनवाई होगी।
लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन पर भी चर्चा: कमेटी के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि सभी वर्गों से महत्वपूर्ण सुझाव मिले। यूसीसी के तहत सहमति से लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन का प्रावधान प्रस्तावित है, ताकि महिलाओं के अधिकारों और उनके भरण-पोषण की रक्षा की जा सके।
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