भारतीय सिनेमा के महान गायक और अभिनेता स्वर्गीय किशोर कुमार की जन्मस्मृति पर मंगलवार को रवीन्द्र भवन का माहौल पूरी तरह संगीत में डूब गया।
मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित संगीत संध्या ‘ये शाम मस्तानी’ में एक ओर संगीतकार और गायक अनु मलिक ने अपने लोकप्रिय गीतों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया, तो दूसरी ओर ‘के फॉर किशोर’ के विजेता गायक अनिल श्रीवास्तव ने किशोर कुमार के सदाबहार नग्मों से समां बांध दिया। कार्यक्रम देर रात तक चला और सभागार में मौजूद संगीत प्रेमियों ने हर गीत पर तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व (स्वतंत्र प्रभार) राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी रहे। उनके साथ संस्कृति विभाग के संचालक एन.पी. नामदेव और उप संचालक डॉ. पूजा शुक्ला भी मौजूद रहे। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
इस दौरान एलएनसीटी ग्रुप के ‘आगाज बैंड’ और सेज विश्वविद्यालय के बैंड को सम्मानित भी किया गया।
मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि किसी भी समाज की सांस्कृतिक चेतना तभी जीवित रहती है, जब वह अपने महापुरुषों और महान कलाकारों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाए। उन्होंने कहा कि संस्कृति विभाग पिछले दस वर्षों से ‘ये शाम मस्तानी’ का आयोजन कर रहा है और यह अब प्रदेश के संगीत प्रेमियों का वार्षिक उत्सव बन चुका है।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को गर्व है कि इसी धरती ने भारतीय सिनेमा को किशोर कुमार जैसा बहुमुखी कलाकार दिया।
भोपाल की तहजीब की तारीफ, फिर गूंजे सुपरहिट गीत
मंच पर आते ही अनु मलिक ने भोपाल की तहजीब और मेहमाननवाजी की सराहना की। उन्होंने कहा कि किशोर कुमार की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम का हिस्सा बनना उनके लिए सम्मान की बात है। इसके बाद उन्होंने ‘ये काली काली आंखें’ से प्रस्तुति की शुरुआत की और गीत के बनने की कहानी भी साझा की।
इसके बाद ‘एक गरम चाय की प्याली हो’, ‘जवानी फिर न आए’ और ‘ऊंची है बिल्डिंग’ जैसे लोकप्रिय गीतों ने माहौल को उत्साह से भर दिया।
अनिल श्रीवास्तव ने जगा दी किशोर दा की यादें
इसके बाद मंच संभाला ‘के फॉर किशोर’ के विजेता अनिल श्रीवास्तव ने। उन्होंने कार्यक्रम के शीर्षक गीत ‘ये शाम मस्तानी’ से शुरुआत की और फिर ‘रिमझिम गिरे सावन’, ‘एक अजनबी हसीना से’, ‘मेरे सामने वाली खिड़की में’, ‘ये जो मोहब्बत है’ और ‘सलाम-ए-इश्क’ जैसे गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को भावुक भी किया और झूमने पर भी मजबूर किया।
युवा बैंड्स ने भी दिखाया दम
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें युवा कलाकारों को भी मंच दिया गया। अंतर-महाविद्यालयीन प्रतियोगिता से चयनित सेज विश्वविद्यालय और एलएनसीटी ग्रुप के बैंड ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी।
सेज विश्वविद्यालय के बैंड ने ‘हाल क्या है दिलों का’, ‘हमें तुमसे प्यार कितना’, ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’ और ‘ओम शांति ओम’ को नए अंदाज में पेश किया। वहीं एलएनसीटी ग्रुप के ‘आगाज बैंड’ ने ‘बचना ऐ हसीनों’, ‘नीले-नीले अंबर पर’, ‘मेरे सपनों की रानी’ और ‘ओ मेरे दिल के चैन’ जैसे गीतों से पूरे सभागार को सुरों से सराबोर कर दिया।
अनु मलिक बोले- कभी हाथ जोड़कर लोगों से काम मांगा
अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करते हुए अनु मलिक कहते हैं- मैं अपनी सक्सेस का श्रेय अपने पिताजी को देता हूं, क्योंकि उनके आंसुओं ने अनु मलिक को बनाया। उन्होंने बहुत दर्द देखा था, उनके पास पैसे नहीं थे, काम नहीं था। वे बहुत टैलेंटेड इंसान थे, लेकिन उनके टैलेंट की कभी किसी ने कदर नहीं की थी।पढ़ें पूरी खबर
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