Radhan Pandit: ज्योतिष भविष्य का संकेत देने वाला इंडिकेटर ही नहीं विज्ञान भी है. जिस पर हजारों मील दूर बैठे विदेशी भी भरोसा करते हैं. राधन पंडित ने पहली मुलाकात में विजय को कहा था—जा बच्चा, तू जल्द मुख्यमंत्री बनेगा. तब लोग उन पर हंस रहे थे. भविष्यवाणी सच हुई तो लोग उन्हें पूजने लगे, उनकी वेबसाइट पर इतना ट्रैफिक आया कि वो बैठ गई.
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Radhan Pandit: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलापति विजय ने अपनी जीत की भविष्यवाणी करने वाले ज्योतिषी राधन पंडित को ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी नियुक्त किया है. राधन पंडित नाम के ज्योतिषाचार्य ने जब वो भविष्यवाणी की थी, तब विजय को भी यकीन नहीं हुआ था किअगले साल 2026 में वो मुख्यमंत्री यानी सीएम बन जाएंगे. वहीं दूसरी ओर सनातन को गाली देने वाले, सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया बताने वाली स्टालिन एंड संस यानी एमके स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन के कार्यकर्ताओं को तो छोड़िए, उनके पर्सनल एस्ट्रोलॉजर्स को भनक तक नहीं होगी. उनके यजमानों के कान में जो सीटी की आवाज सुनाई दे रही थी. उस सीटी को सुनते-सुनते उनके साथ ऐसा लंका कांड होगा कि उनकी सत्ता एक सीटी की आवाज में उड़ जाएगी.
रस्सी जल गई स्टालिन का बल नहीं गया
आपको बताते चलें कि ज्योतिष विज्ञान को, धर्म को गरियाने वाले उदयनिधि स्टालिन ने 12 मई को एक बार फिर सनातन का अपमान करते हुए करोड़ों सनातनियों का आस्था से खिलवाड़ किया. विधानसभा सत्र में डीएमके के नेता सनातन हिंदू धर्म को लेकर आंय बांय सांय बोलते हुए व्यर्थ की बकवास करते नजर आए. शायद इसी तरह की बातों से तंग आकर तमिलनाडु की जनता ने 70 साल पुरानी परंपरा तोड़ते हुए नई राजनीतिक पार्टी को काम करने का मौका दिया. टीवीके (TVK) की सुनामी में डीएमके (DMK) की नैया डूब गई. जिसमें सवार कांग्रेस की लुटिया डूबने के कगार पर पहुंची तो कांग्रेस ने डीएमके का टाइटेनिक डूबने से ठीक पहले उससे कन्नी काटकर टीवीके का दामन थाम लिया. तमिल जनता ने भी DMK और AIADMK की नाटकीय राजनीति को खारिज करते हुए पहली बार चुनाव लड़ने वाली टीवीके (Tamilaga Vettri Kazhagam) को मौका दिया.
दोनों ही पुराने दल जनता की नब्ज नहीं पकड़ पाए. इसके बाद भी वे पुरानी गलतियां दोहरा रहे हैं. मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के चश्मोचिराग उदयनिधि स्टालिन ने फिर से सनातन धर्म पर विवादित बयान दिया. उनके इस बयान ने तमिलनाडु में तो बवाल मचाया ही है, देश में फिर से एक भूचाल ला दिया है.
क्रिश्चियन विजय सनातन का अपमान नहीं करते, पंडितजी को बनाया ओएसडी
थलापति विजय यानी जोसेफ विजय चंद्रशेखर, ईसाई धर्म को फॉलो करते हैं. उनके पिता एस ए चंद्रशेखर ईसाई हैं, तो मां श्रीमती शोभा चंद्रशेखर हिंदू हैं. मिश्रित रिलीजियस बैकग्राउंड से आने वाले विजय अपनी मां के साथ मंदिर जाते हैं और सभी धर्मों का पूरा सम्मान करते हैं. उन्होंने ईसाई होकर भी कभी सनातन हिंदू धर्म या देवी-देवताओं और ब्राह्मणों को गाली नहीं दी. जबकि द्रविड़ राजनीति का पूरा आधार ही सनातन और ब्राह्मण विरोध पर टिका रहा है. विजय ने साल भर पहले जब सोचा भी नहीं होगा कि कितनी सीटें आएंगी, क्या होगा, क्या नहीं होगा. ऐसे सारे सवालों के जवाब दिए हैं.
फैसले की हो रही आलोचना
हालांकि विपक्षी दलों ने राधन पंडित की नियुक्ति पर नाराजगी जताई है. विजय के राजनीतिक विरोधी उन्हें सिर्फ ईसाइयों का नेता बता रहे हैं. वहीं, थलापति विजय ने एक ही झटके में तमिलनाडु की सत्ता के पुराने मठाधीशों को आईना दिखा दिया है. तमिलनाडु में क्रिश्चियन धर्म के फॉलोवर्स की आबादी मात्र 6 फीसदी है.
विजय के राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि मुख्यमंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) का काम आमतौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय, राजनीतिक नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं, सरकारी विभागों और जनता के बीच एक अहम कड़ी के रूप में काम करना होता है. यह पद रणनीतिक और प्रभावशाली माना जाता है, इसलिए उन्हें पंडित को ओएसडी नहीं बनाना चाहिए था. दरअसल इस पद का दायित्व बहुत महत्वपूर्ण होता है. ओएसडी, राजनीतिक समन्वय और त्वरित फैसलों से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री के करीबी साथी के रूप में काम करता है.
राधन पंडित कौन हैं?
चार दशकों से अधिक समय तक वैदिक ज्योतिष, अंक ज्योतिष और ध्यान आधारित परामर्श देने वाले ज्योतिषी राधन पंडित ने सार्वजनिक जीवन की बड़ी चुनौतियों से जूझ रहे लोगों के बीच देश के सबसे चर्चित सलाहकारों में अपनी पहचान बनाई है. दक्षिण भारत में जन्मे पंडित पहले ‘वेट्रिवेल’ नाम से काम करते थे. 2008 में दिल्ली आने के बाद उन्होंने राधन पंडित नाम अपनाया, जो उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया.
रिक्की राधन पंडित वेट्ट्रीवेल की पहचान तमिलनाडु में एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिषी के रूप में है. उनका राजनीतिक और कारोबारी जगत में काफी प्रभाव है. वो पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के भी करीबी रह चुके हैं. स्वर्गीय जयललिता महत्वपूर्ण मामलों पर उनसे सलाह लेती थीं. राजनीतिक चर्चाओं के अलावा, वे सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं, जहां वे नियमित रूप से ज्योतिष से संबंधित अंतर्दृष्टि और भविष्यवाणियां साझा करते हैं.
विजय क्रिश्चियन होकर भी सनातन की महिमा जानते हैं, वो किसी को ठेस नहीं पहुंचाते हैं. वो बखूबी जानते हैं कि सनातन और ब्राह्मणों का समाज में क्या स्थान है. मानो वो यह भी जानते हैं- ‘देवाधीनं जगत्सर्वं, मंत्राधीनं देवता. ते मंत्रा विप्रं जानन्ति, तस्मात् ब्राह्मण देवता: अर्थात यह सारा जगत अनेक देवों के अधीन है. अर्थात देवता मंत्रों के अधीन हैं. मंत्र ब्राह्मण के अधीन हैं इसे कुछ लोग अतिश्योक्ति मानते हैं.
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श्वेतांक रत्नाम्बर पत्रकारिता जगत में 22 साल का अनुभव रखते हैं. देश-दुनिया की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत रखने वाले श्वेतांक को राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ है. ZEE न्यूज…और पढ़ें
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