होर्मुज पर नाकेबंदी… तनाव के बीच, चीन जा रहे ट्रंप, इन मुद्दों पर हो सकती है तनातनी – AajTak

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर से बढ़ चुका है और ट्रंप ने कहा है कि सीजफायर अब ‘लाइफ सपोर्ट’ पर है. ऐसे में जंग के नए सिरे से शुरू होने की आशंका बढ़ चुकी है. वहीं स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी भी जारी है और बहुत से जहाज अटके हुए हैं. इस बीच, ट्रंप चीन के दौरे पर जा रहे हैं. 
बुधवार को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप चीन पहुंच जाएंगे, जहां पर कई बातों पर सहमति बन सकती है. खासकर ईरान-अमेरिका के बीच जंग रुकवाने की पहल हो सकती है. साथ ही होर्मुज को खोलने पर भी तनातनी की स्थिति बन सकती है. इसके अलावा, ताइवान और सेमीकंडक्‍ट को लेकर भी बात हो सकती है. आइए जानते हैं कौन-कौन से मुद्दे हैं, जिनपर बात हो सकती है… 
ईरान-अमेरिका जंग पर बात
ग्‍लोबल टेंशन के बीच, ट्रंप का चीन दौरे पर पूरी दुनिया की नजर है. इस दौरे पर चीन और अमेरिका होर्मुज को खोलने और जंग को रुकवाने को लेकर बातचीत कर सकते हैं. क्‍योंकि चीन ईरान का करीबी माना जाता है और वह होर्मुज के रास्‍ते ज्‍यादातर एनर्जी आयात करता है. ऐसे में ईरान जंग को रुकवाने के लिए वह ट्रंप से बातचीत कर सकता है. 
ट्रेड वॉर और टैरिफ सबसे बड़ा मुद्दा
ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत में सबसे अहम मुद्दा व्यापार और टैरिफ रहने वाला है. पिछले साल अमेरिका ने चीन पर भारी टैरिफ लगाए थे, जिसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामान पर जवाबी शुल्क बढ़ा दिए थे. इससे दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर और तेज हो गया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों पक्ष अब कुछ राहत देने और व्यापारिक संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर सकते हैं. 
अमेरिका चाहता है कि चीन अमेरिकी कृषि उत्पाद, ऊर्जा और विमान खरीद बढ़ाए. वहीं चीन चाहता है कि अमेरिका टेक्नोलॉजी और एक्सपोर्ट कंट्रोल में नरमी दिखाए. 
रेयर अर्थ मिनरल्स 
रेयर अर्थ मिनरल्स और हाईटेक सप्लाई चेन भी बैठक का बड़ा एजेंडा हो सकता है. चीन दुनिया में रेयर अर्थ प्रोसेसिंग में सबसे मजबूत स्थिति में है और उसने पहले अमेरिका पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाए थे. अमेरिका इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस और AI सेक्टर के लिए इन मिनरल्स पर काफी निर्भर है. ऐसे में एक्‍सपर्ट्स मान रहे हैं अमेरिका चीन से सप्‍लाई बाधाएं कम करने की मांग कर सकता है, जबकि चीन बदले में अमेरिकी टैरिफ में राहत चाहता है. 
ताइवान मुद्दे पर भी होगी बात 
ताइवान को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव पहले से बना हुआ है. चीन लगातार ताइवान को अपना हिस्सा बताता रहा है, जबकि अमेरिका ताइवान को डिफेंस सपोर्ट देता है. हाल के महीनों में अमेरिका ने ताइवान को हथियारों की सप्लाई दी है, जिससे चीन नाराज है. 
टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्‍टर 
AI, चिप्स और हाईटेक इंडस्ट्री पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत संभव है. अमेरिका लगातार चीन की टेक्नोलॉजी कंपनियों और चिप एक्सपोर्ट पर कंट्रोल बढ़ा रहा है, जबकि चीन इसे आर्थिक दबाव मानता है. दोनों देश AI सुरक्षा और टेक्नोलॉजी प्रतिस्पर्धा को लेकर संवाद बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं. 
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News