लटक गया वक्फ बिल? BJP सांसद निशिकांत दुबे ने रखा JPC का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव, बजट सेशन में हो सकता है पेश – Aaj Tak

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वक्फ संशोधन बिल को अब अगले साल (2025) बजट सेशन में पेश किया जा सकता है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने खुद इस मामले को लेकर बनी संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. दरअसल, पहले इस बिल को मौजूदा (शीतकालीन सत्र) में लाने की तैयारी थी, लेकिन जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की बैठकों में लगातार बढ़ते विवादों के चलते इसे टालना पड़ा.
निशिकांत दुबे के मुताबिक समिति को अपनी रिपोर्ट संसद के बजट सत्र की पहली सप्ताह में सौंपनी चाहिए. JPC के अध्यक्ष जगदंबिका पाल इस प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास भेजेंगे. बता दें कि विपक्षी नेता खासकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी JPC की कार्यशैली और बिल के प्रावधानों पर सवाल उठा रहे हैं.
JPC में क्यों हो रहा है विवाद?
वक्फ बिल की समीक्षा के लिए गठित JPC का कामकाज शुरू से ही सुचारू नहीं रहा. यहां हर बैठक में हंगामा और तीखी बहस हो रही है. बीजेपी और विपक्षी दलों के सदस्यों के बीच आए दिन बहस और आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं. स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि एक बैठक के दौरान बोतल फेंकने तक की घटना सामने आई. इन विवादों के कारण JPC के कई महत्वपूर्ण काम भी प्रभावित हुए हैं, जैसे राज्यों का दौरा करना और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना.
कौन से सुधार हैं प्रस्तावित
1. केंद्रीय निगरानी: एक सेंट्रल वक्फ काउंसिल का गठन होगा, जो राज्यों के वक्फ बोर्डों की निगरानी करेगा.
2. पारदर्शिता: वक्फ संपत्तियों का ऑडिट और उनकी सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.
3. संपत्तियों की सुरक्षा: अतिक्रमण हटाने के लिए नए उपाय किए जाएंगे और इन संपत्तियों का सही उपयोग सुनिश्चित होगा.
4. कानूनी मजबूती: वक्फ विवादों को सुलझाने के लिए ट्रिब्यूनल को अधिक अधिकार दिए जाएंगे.
क्यों हो रही बदलाव की मांग?
बता दें कि 2013 में यूपीए की सरकार में वक्फ बोर्ड की शक्तियों को बढ़ा दिया गया था. आम मुस्लिम, गरीब मुस्लिम महिलाएं, तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के बच्चे, शिया और बोहरा जैसे समुदाय लंबे समय से कानून में बदलाव की मांग कर रहे थे. इन लोगों का कहना था कि वक्फ में आज आम मुसलमानों की जगह ही नहीं है. सिर्फ पावरफुल लोग हैं. रेवन्यू पर सवाल है. कितना रेवन्यू आता है, इसका कोई आकलन नहीं करने देता. रेवेन्यू जब रिकॉर्ड पर आएगा तो वो मुस्लिमों के लिए ही इस्तेमाल होगा. देश में अभी 30 वक्फ बोर्ड हैं. सभी वक्फ संपत्तियों से हर साल 200 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है.
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