-मुठभेड़ में शामिल कुछ पुलिसकर्मियों की गलती पूरे महकमे पर पड़ रही भारी -गोली का जवाब गोली से देने के चक्कर में पुलिस के 12 घंटे के संयम पर फिर गया पानी -भरत को समझाने को 16 जून की शाम से 17 जून की सुबह तक चली थी कवायद -भरत तिवारी की मौत के बाद पुलिस के अपने भी विरोध में उतरे, उठ रही केस करने की मांग आरा। हिन्दुस्तान संवाददाता भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी निवासी जिस भरत भूषण तिवारी को पुलिस 16 जून की शाम तक मानसिक रूप से अस्वस्थ मान बता रही थी, वह एनकाउंटर के बाद नायक बन गया। पुलिस एनकाउंटर में उसकी मौत की गूंज अब समूचे देश में सुनाई पड़ने लगी है। बिहार सहित भारत के शहर एवं कई प्रदेशों से काफी लोग भरत भूषण तिवारी को श्रद्धांजलि देने और विरोध जताने बिलौटी गांव पहुंच रहे हैं। कोई उसे शहीद बता रहा है, तो कोई उस मिट्टी को चूम रहा है, जहां उसका एनकाउंटर हुआ था। लोग उसके माता-पिता को नमन कर रहे हैं। फेसबुक पर लाइव इस एनकाउंटर ने जहां भरत भूषण तिवारी को हीरो बना दिया, वहीं इस घटना से अब तक संवेदनशील माने जाने वाली भोजपुर पुलिस की छवि को खासा बट्टा लगा है। गोली का जवाब गोली से देने के चक्कर में शाहपुर पुलिस की काफी किरकिरी हो रही है और 12 घंटे के संयम और परिश्रम पर पानी फिर गया। नतीजा यह हुआ कि देखते ही देखते पुलिस आम लोगों की नजर में विलेन बन गयी। माना जा रहा है कि लाइव एनकाउंटर ने इस घटना को पूरे देश में चर्चित कर दिया है। एनकाउंटर की इस घटना से जहां विपक्ष को सरकार और प्रशासन को घेरने का बड़ा मुद्दा मिल गया है, वहीं पुलिस के अपने भी एनकाउंटर का जोरदार विरोध करने लगे हैं। बिहार के डीजीपी रहे गुप्तेश्वर पांडेय और अभ्यानंद जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी इस एनकाउंटर को गलत ठहरा रहे हैं। एनकाउंटर में शामिल पुलिस वालों पर हत्या का केस दर्ज करने की वकालत भी की जाने लगी है। सभी का यही मानना है कि हथियार फेंकने के बाद पुलिस को भरत भूषण तिवारी को गोली नहीं मारना चाहिए था। हालांकि, भोजपुर पुलिस का दावा है कि आत्मरक्षार्थ गोली चलानी पड़ी थी। इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि भरत भूषण तिवारी सरेंडर करने के नाम पर छलावा कर रहा था। वह सरेंडर करने के नाम पर पिस्टल फेंक रहा था और पुलिस के नजदीक पहुंचने पर हथियार उठाकर फायरिंग करने लगता था। ऐसे में पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। इधर, कुछ लोगों का कहना है कि लाइव मुठभेड़ पुलिस के गले की फांस बन गयी है। मामले की शुरुआत 19 जून की शाम से हुई थी। दरअसल सोशल मीडिया पर हथियार लहराने की सूचना पर शाहपुर पुलिस 16 जून की शाम मामले की छानबीन करने बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी के घर पहुंची थी। उस दौरान पुलिस को पता चला कि भरत भूषण तिवारी मानसिक रूप से अस्वस्थ है। तब पुलिस उसे समझाने में जुट गई थी। लेकिन, भरत भूषण तिवारी की ओर से थानाध्यक्ष के समक्ष ही पुलिस कर्मियों पर पिस्टल तान दी गई थी। गाली-गलौज करते हुए पुलिस को चुनौती भी दी गई थी। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो खूब वायरल हुआ था। कुछ अन्य वीडियो भी वायरल हो रहे थे, जिसमें भरत भूषण तिवारी की ओर से पिस्टल के साथ पुलिस को चुनौती दी जा रही थी। उस समय भी पुलिस की ओर से उसे समझाने का प्रयास करते देखा जा रहा था। 17 जून की सुबह पुलिस की गिरफ्तारी करने भरत भूषण तिवारी के घर पहुंची। उस समय भी भरत भूषण तिवारी की ओर से घर की छत से पुलिस पर फायरिंग की गयी थी। उस समय भी वह फेसबुक पर लाइव था। तब पुलिस को पीछे हटना पड़ा था। इसके कुछ देर बाद एसटीएफ की मदद से पुलिस उसकी गिरफ्तारी करने पहुंची। तब भरत भूषण तिवारी बधार में भाग निकला और फेसबुक लाइव आकर पुलिस को युद्ध की चुनौती देने लगा। उस दौरान वह फायरिंग भी कर रहा था। पुलिस की ओर से भी जवाबी फायरिंग की गयी है। इसमें उसके दोनों पैर में गोली लगी और वह जख्मी हो गया। बाद में पटना पीएमसीएच में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। चूंकि एनकाउंटर के समय भरत भूषण तिवारी फेसबुक पर लाइव था। उसमें देखा जा रहा था कि पुलिस की ओर से आश्वासन देने के बाद वह हथियार फेंक रहा है और सरेंडर करने की बात कह रहा था। हालांकि उसके बाद लाइव बंद हो गया था। …
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