Shreeom Singh
Date: 30-09-26 11:59
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. यहां लिव-इन में रह रहे एक दंपती ने अपने करीब एक महीने के बच्चे को 1.2 लाख रुपये में बेच दिया. हैरानी की बात यह है कि बच्चे को बेचने से मिले पैसों से उन्होंने सोने के गहने और दो स्मार्टफोन खरीद लिए. पुलिस को जब इस मामले की जानकारी मिली तो बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया गया. इस मामले में बच्चे के माता-पिता समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकुंदवाड़ी में रहने वाले इस दंपती ने अपने बेटे को 1.2 लाख रुपये में सीमा रेशवाल को सौंप दिया था. इसके बाद बच्चा एक के बाद एक कई लोगों के हाथों बिका और तेलंगाना पहुंचते-पहुंचते उसकी कीमत 3.5 लाख रुपये तक पहुंच गई. वहीं, बच्चे के माता-पिता ने मिले पैसों से अपने लिए महंगी चीजें खरीदीं.
बच्चे को बेचने की मिली सूचना
पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार के मुताबिक, पुलिस को गुमनाम सूचना मिली थी कि मुकुंदवाड़ी का एक दंपती अपने बच्चे को बेच चुका है. इसके बाद बच्चे की मां वंदना कांबले को पूछताछ के लिए बुलाया गया. 20 सितंबर को वंदना ने खुद अपने बच्चे के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी.
जांच के दौरान पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं. इसके बाद मुकुंदवाड़ी थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 142, 143(4), 3(5) और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 81 के तहत मामला दर्ज किया गया.
जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि वंदना और योगेश कांबले पिछले दो-तीन साल से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे. 5 जुलाई को सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उनके बेटे का जन्म हुआ था. पुलिस के मुताबिक, वंदना बच्चे को अपने पास नहीं रखना चाहती थी. उसने अपनी सहकर्मी कौशल्या पवार से मदद मांगी. कौशल्या ने उसकी मुलाकात अपनी बेटी सीमा रेशवाल से कराई, जिसके बाद बच्चे को बेचने का सौदा तय हुआ.
एक के बाद एक कई लोगों को बेचा गया बच्चा
दंपती ने करीब एक महीने तक बच्चे को अपने पास रखने के बाद 1.2 लाख रुपये नकद लेकर उसे सीमा रेशवाल को सौंप दिया. इसके बाद सीमा ने बच्चे को अपने रिश्तेदार संगीता अव्हड को 2.7 लाख रुपये में बेच दिया.
संगीता बच्चे को नांदेड़ ले गईं और वहां से उसे तेलंगाना के जगित्याल निवासी सुरेश राजाराम गुंटुका को 3.5 लाख रुपये में बेच दिया. गुंटुका खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बताता था, लेकिन जांच में उसके नकली डॉक्टर होने की बात सामने आई. इसके बाद उसने बच्चे को हैदराबाद में रहने वाली अपनी रिश्तेदार उमा गंगाधर खटकम को सौंप दिया.
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे सौदे में सीमा रेशवाल को 1.1 लाख रुपये मिले, जबकि कौशल्या को 40 हजार रुपये मिले. कौशल्या ने इन पैसों का इस्तेमाल अपना कर्ज चुकाने में किया.
बच्चे को बेचकर खरीदा सोना और स्मार्टफोन
बच्चे के माता-पिता को 1.2 लाख रुपये मिले थे. पुलिस के अनुसार, इस रकम में से उन्होंने 25 हजार रुपये का स्मार्टफोन और 62 हजार रुपये के सोने के गहने खरीदे. पुलिस ने दोनों सामान जब्त कर लिए हैं.
रविवार को सुरेश राजाराम गुंटुका और उमा गंगाधर खटकम बच्चे को लेकर मुकुंदवाड़ी पुलिस स्टेशन पहुंचे और उसे पुलिस को सौंप दिया. इसके बाद बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया. समिति ने बच्चे को सुरक्षा और पुनर्वास के लिए अधिकृत बाल देखभाल संस्थान ‘सकार’ के हवाले कर दिया.
इस मामले में बच्चे के माता-पिता समेत सभी सात आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं. पुलिस आयुक्त प्रवीण पवार ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं यह मामला राज्य की सीमाओं के बाहर चल रहे किसी बड़े बाल तस्करी नेटवर्क से तो नहीं जुड़ा है.
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