परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए डीएमके के साथ को लेकर चल रही अटकलों के बीच सोमवार को संसद में अलग रंग दिखा। डीएमके सरकार से दूरी बनाती दिखी। पार्टी ने राज्यसभा में पेश किए गए वंदेमातरम् विधेयक का विरोध किया और साफ कहा कि यह संविधान के विरुद्ध है। तमिलनाडु में सत्ता गंवाने के बाद डीएमके इंडिया गठबंधन से दूरी बना रही है। उसकी नाराजगी तब बढ़ी थी जब सहयोगी कांग्रेस पार्टी ने टीवीके को सरकार बनाने के लिए समर्थन का ऐलान किया था। इसके बाद माना गया कि अब डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं रह गई है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर उसने इसका ऐलान नहीं किया है।
संसद में भी डीएमके अब इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा नहीं ले रही है। ऐसे में सुगबुगाहट शुरू हुई थी कि भाजपा की तरफ से परिसीमन विधेयक को लेकर उसे साधने की कोशिश की जा रही है। इसमें दोनों विकल्प थे कि उसे एनडीए का हिस्सा बना लिया जाए या फिर वह तटस्थ होकर सरकार की मदद करे। लेकिन वंदे मातरम् विधेयक पर डीएमके के रुख से साफ है कि वह भाजपा के साथ खड़ी नहीं दिखना चाहती। कुछ समय पूर्व डीएमके की तरफ से कहा गया था कि वह इंडिया गठबंधन में नहीं रहने के बावजूद भाजपा के खिलाफ ही सक्रिय रहेगी।बता दें कि लोकसभा में डीएमके के 22 और राज्यसभा में आठ सांसद बेहद महत्वपूर्ण हैं। परिसीमन जैसे विधेयक पर जहां सत्ता पक्ष को दो तिहाई बहुमत की दरकार है, ऐसे में दोनों सदनों में डीएमके का साथ सरकार के लिए काफी फायदेमंद हो सकता था। लेकिन डीएमके के रुख से ऐसा होने की संभावना काफी कम हो गई है।
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