'विकसित भारत के लिए बड़े आर्थिक सुधारों की तैयारी', स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बोले पीएम मोदी – Jagran

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े आर्थिक सुधारों का संकेत दिया, कहा कि विकसित भारत के लिए पुरानी नीतियों से काम नहीं चलेगा और सुधारों की गति बढ़ानी होगी।
पीएम मोदी।
प्रधानमंत्री ने विकसित भारत हेतु बड़े आर्थिक सुधारों का आह्वान किया।
भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने का लक्ष्य निर्धारित।
देश में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू, आठ और पाइपलाइन में।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जल्द ही बड़े आर्थिक सुधारों के संकेत दिए। उन्होंने साफ कहा कि विकसित भारत के सपनों को पूरा करने के लिए बीते काल की नीतियों से काम नहीं चलेगा। हमें बड़े रिफार्म के साथ रिफार्म की गति भी बढ़ानी होगी और इस काम में राज्य सरकार को भी सहयोग करना होगा।
राज्य सरकार, इंडस्ट्री और देशवासियों की बदौलत ही दुनिया की 500 बड़ी कंपनियों में भारत की 50 कंपनियां शामिल हो सकती है। विश्व के पांच टाप बैंक में भारत का भी बैंक होना चाहिए। फार्मा के क्षेत्र में भारत ने बहुत काम किया है और कम से कम एक-दो भारतीय फार्मा कंपनियों का नाम वैश्विक स्तर पर गूंजना चाहिए।
वैश्विक ला फर्म, एकाउंटिंग फर्म और रेटिंग एजेंसियों में भी भारत का नाम टाप पर होना चाहिए। क्योंकि भारत के पास योग्यता है, सामर्थ्य है। अभी फार्चुन 500 कंपनियों में भारत की 10 कंपियां शामिल हैं। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलआईसी, ओएनजीसी, एसबीआइ, एचडीएफसी, इंडियन ऑयल, टोटा मोटर्स जैसी कंपनियां प्रमुख हैं। लेकिन दुनिया के टाप पांच क्या दुनिया के 10 शीर्ष बैंक में एक भी बैंक भारत का नहीं है।
वित्त मंत्रालय का मानना है कि एसबीआइ और एचडीएफसी बैंक में टाप बैंकों में शामिल होने की क्षमता है। वैसे ही, भारत दुनिया का 20 प्रतिशत जेनेरिक दवा का उत्पादन कहना है, लेकिन सन फार्मा को छोड़ किसी भी कंपनी की वैश्विक पहचान नहीं हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने कंपनियों से वैश्विक बनने के लिए कहा है और सरकार भी इस काम में कंपनियों के सहयोग के लिए बड़े रिफार्म लेकर आ सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे ब्रांड हमारे देश की पहचान हो। ऐसा तभी संभव है जब हम ऐसे उत्पाद का निर्माण करने लगे जिसकी जरूरत पूरी दुनिया को हो।
यह सब बड़े अनुसंधान, बड़े जोखिम से ही संभव हो सकेगा और उसके लिए बड़े रिफार्म करने होंगे। तभी प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि अनुसंधान के लिए इस बार के बजट में एक लाख करोड़ रुपए का प्रविधान रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका, चीन जैसे देशों की तरफ से अनुसंधान में होने वाले खर्च के मुकाबले भारतीय खर्च अति मामूली है।
मैन्यूफैक्चरिंग आरंभ करने के लिए अब भी दर्जनों नियमों के अनुपालन में काफी समय लगता है। \Bतीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू, आठ और शुरू होने वाले\Bप्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बताया कि देश में चिप निर्माण से जुड़े तीन प्लांट शुरू हो गए हैं और अगले कुछ सालों में आठ और प्लांट उत्पादन करने लगेंगे। किसी भी इलेक्ट्रानिक्स सामान के साथ मेडिकल उपकरण या ऑटोमोबाइल्स के लिए चिप अनिवार्य है।
भारत में चिप निर्माण से जुड़ी कंपनियों में माइक्रोन टेक्नोलाजी, टाटा इलेक्ट्रानिक्स, सीजी पावर, केंस सेमीकान, एचसीएल-फाक्सकान प्रमुख रूप से शामिल हैं।तीन साल पहले तक भारत में चिप निर्माण असंभव लग रहा था। लेकिन सरकार की तरफ से वित्तीय पैकेज की घोषणा और नियमों में बड़े बदलाव से अब देश में दर्जन भर से अधिक कंपनियां चिप निर्माण से जुड़े क्षेत्र में निवेश कर रही है।
अगले दो-तीन साल में भारत चिप का बड़ा निर्यातक देश होगा। चिप के बगैर कोई भी देश विकास नहीं कर सकता है और जिस देश के पास कम लागत में अधिकाधिक चिप उपलब्ध होगा, उसे आर्थिक रूप से भारी लाभ मिलेगा। अभी भारत बड़ी संख्या में चिप का आयात करता है जो धीरे-धीरे कम होता जाएगा।

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