सिटी रिपोर्टर | भभुआ
विकसित भारत 2047 विकास की सनातन दृष्टि विषय पर भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान राष्ट्रपति निवास शिमला में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य वक्ता के रुप मे बोलते हुए कैमूर जिला अंतर्गत भभुआ शहर के निवासी और आम्बेडकरपीठ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के अध्यक्ष प्रो.विवेकानंद तिवारी ने कहा सनातन दृष्टि में विकास का अर्थ केवल भौतिक समृद्धि नहीं, बल्कि मानव और प्रकृति का सह-अस्तित्व है, जो संतुलन और नैतिकता पर आधारित है।
यह दृष्टिकोण भोग के बजाय त्याग और संयम को प्राथमिकता देता है।जहां प्रकृति के शोषण के स्थान पर उसके साथ सामंजस्यपूर्ण विकास की परिकल्पना है।प्रकृति सर्वश्रेष्ठ है और मानव उसका एक हिस्सा मात्र है शोषणकर्ता नहीं।यह दृष्टिकोण पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।समग्र कल्याण विकास का उद्देश्य समाज के हर व्यक्ति का कल्याण है न कि केवल कुछ लोगों की भौतिक प्रगति।भौतिक और आध्यात्मिक समन्वय सनातन परंपरा में भौतिक प्रगति के साथ-साथ आंतरिक ज्ञान चेतना के विकास को भी उतना ही महत्व दिया गया है।यह विकास को केवल तकनीकी या औद्योगिक प्रगति के रूप में नहीं बल्कि सतत विकास के रूप में देखती है।भारत वर्ष की पहचान केवल एक राजनीतिक या आर्थिक इकाई के रूप में नहीं बल्कि एक समृद्ध ज्ञान परंपरा के रूप में रही है।
2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है बल्कि यह सांस्कृतिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास को भी समाहित करता है।भारतीय ज्ञान परंपरा जिसमें वेद,उपनिषद, आयुर्वेद,योग,धर्म, अर्थशास्त्र आदि सम्मिलित है।आज के विकास मॉडल को एक सतत समावेशी और नैतिक आधार प्रदान कर रही है।आज के संदर्भ में यह दृष्टिकोण विकसित भारत 2047 के संकल्प में भी परिलक्षित होता है जो आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर चलने पर जोर देता है। तिवारी टोला निवासी और लब्धप्रतिष्ठ शिक्षक रहे स्व जवाहर तिवारी के पुत्र प्रो.विवेकानंद तिवारी धर्म-दर्शन,विज्ञान, न्याय, सामाजिक,राजनैतिक,सां स्कृतिक एवं इतिहास विषयों के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मर्मज्ञ विद्वान हैं।आचार्य तिवारी की 200 से ज्यादा पुस्तकें और 300 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।अनेक संस्थाओं से डॉ तिवारी को प्राप्त सम्मानों में भारत भारती सम्मान,मालवीय प्रज्ञा सम्मान,राष्ट्र गौरव सम्मान एवं महाशक्ति सम्मान विशेष उल्लेखनीय है।वर्तमान में आम्बेडकरपीठ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के अध्यक्ष हैं।
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