प्रधानमंत्री मोदी के 2047 तक भारत को विकसित बनाने के लक्ष्य पर आधारित यह लेख देश की वर्तमान स्थिति और विकसित राष्ट्र बनने के मानदंडों की पड़ताल करता है।
पीएम मोदी का 2047 तक भारत को विकसित बनाने का लक्ष्य।
विकसित देश के मानदंड: प्रतिव्यक्ति आय, मानव विकास सूचकांक।
भारत की चुनौतियां: कम प्रतिव्यक्ति आय और मानव पूंजी विकास।
महेंद्र प्रताप सिंह। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल में एक बार फिर 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लक्ष्य के लिए काम करने का आह्वान किया है। पीएम का कहना है कि सरकार हर क्षेत्र में इसी लक्ष्य को ध्यान में रख कर काम कर रही है। भारत आज दुनिया की एक प्रमुख आर्थिक आर्थिक शक्ति है। कामकाजी आबादी के लिहाज से भारत युवा देश है।
140 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश में लोग आकांक्षाओं से उत्प्रेरित हैं। इसके बावजूद विकसित देश का लक्ष्य हासिल करने की राह में चुनौतियां भी बड़ी हैं। एक देश को कौन सी चीजें विकसित देश की श्रेणी में खड़ा करती हैं और इसकी तुलना में हम आज कहां खड़े हैं, इसकी पड़ताल ही आज का मुद्दा है?
किसी भी देश को विकसित मानने का मानदंड केवल उसकी अर्थव्यवस्था के आकार से तय नहीं होता, बल्कि उसके नागरिकों के जीवन स्तर और सामाजिक संकेतकों से तय होता है।
विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र के अनुसार किसी देश को विकसित बनाने वाले प्रमुख कारक हैं:
प्रतिव्यक्ति आय: 14005 डॉलर से अधिक होनी चाहिए देश की प्रति व्यक्ति आय
मानव विकास सूचकांक (एचडीआई): इसमें जीवन प्रत्याशा , शिक्षा के औसत वर्ष और प्रतिव्यक्ति आय शामिल हैं।
0.800 से अधिक स्कोर वाले देश बहुत उच्च मानव विकास श्रेणी में आते हैं।
औद्योगीकरण और बुनियादी ढांचा: आधुनिक अवसंरचना, मजबूत डिजिटल नेटवर्क, उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा।
जीवन की गुणवत्ता: बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, कम शिशु मृत्यु दर और उच्च जीवन प्रत्याशा।
भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन उच्च जनसंख्या के कारण प्रतिव्यक्ति आय और मानव विकास संकेतकों में यह विकसित देशों से काफी पीछे है।-1791788593916.webp)
भारत एक विकासशील देश है। हालांकि यह दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन विकसित देशों की सूची में शामिल होने के लिए भारत के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं:-1791788668648.webp)
प्रतिव्यक्ति आय में अंतर: भारत की कुल जीडीपी बड़ी है, लेकिन प्रतिव्यक्ति आय विकसित देशों की तुलना में काफी कम है।-1791788693559.webp)
मानव पूंजी विकास: शिक्षा की गुणवत्ता, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडी) पर खर्च और सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में सुधार की आवश्यकता है।-1791788711547.webp)
रोजगार और कौशल विकास: कृषि पर निर्भरता कम करके उच्च-उत्पादकता वाले विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में कौशल विकास बढ़ाना अनिवार्य है।