महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने INDIA गठबंधन द्वारा सुप्रीम कोर्ट की तरफ निकाले गए मार्च की कड़ी आलोचना की. शिंदे ने एक प्रेस कांफ्रेस में कल (सोमवार) के दिन को देश के इतिहास का काला दिन करार दिया. शिंदे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पर मार्च निकालकर दबाव बनाने की कोशिश करना या उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना भारत के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना है. शिंदे ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा लिखे गए संविधान ने सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की स्थापना की थी.
ऐसी संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ मार्च करना, विरोध प्रदर्शन करना या उस पर दबाव डालना भारत की सर्वोच्च न्याय व्यवस्था पर हमला था और उस व्यवस्था का अपमान था. शिंदे ने इस मार्च की कड़ी निंदा करते हुए मांग की कि राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेताओं से देश की 140 करोड़ जनता से माफी मांगने की मांग की.
शिंदे ने कहा कि आज लोकतंत्र और संविधान खतरे में है क्योंकि जिनकी जिम्मेदारी संविधान को बनाए रखने की है, कि वो ही लोकतंत्र का गला घोंट रहे हैं. दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी हरकतें सामान्य नहीं हैं और लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ हैं. ‘लोकतंत्र खतरे में है’ कहकर प्रधानमंत्री मोदी के घर के सामने आंदोलन किया जा रहा है.
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शिंदे ने कहा, “हर दिन हम जो देख रहे हैं, वो सामान्य बात नहीं है. कई विदेशी ताकतें देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं. ये लोग विदेशी ताकतों की कठपुतली बन गए हैं. अंतरराष्ट्रीय साजिश की आशंका जताई जा रही है. देश में अराजकता फैलाने का काम किया जा रहा है. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और देश के लिए घातक है. ये हमेशा नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका का उदाहरण देते हैं कि वहां क्या हुआ. इसके जरिए वो एक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं. मोदी से तीन बार हार चुके हैं. सरकार नहीं चला पाने के कारण देश में अशांति फैलाने की कोशिश की जा रही है. EVM पर सवाल उठाते हैं, लेकिन तेलंगाना, कर्नाटक और दूसरे राज्यों में उनकी सरकार है. क्या वहां वोट चोरी हुई थी?”
शिंदे ने विपक्ष के विरोध को देश की स्वतंत्रता पर हमला बताया है. उन्होंने कहा, “देश के सर्वोच्च न्यायाधीश के बारे में क्या बोला जा रहा है? यह देशहित में नहीं है. हमारी सेना ने Surgical Strike की, उस पर भी सवाल उठाए गए. यह देशद्रोह है. पत्रकारों को ‘गोदी मीडिया’ और दिल्ली पुलिस को ‘गली का गुंडा’ कहा गया. किसी व्यक्ति से द्वेष हो सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री का पद सर्वोच्च है. उस पद पर आरोप लगाना किस तरह की राजनीति है?”
शिंदे ने सवाल किया कि जिस तरह से दूसरे देशों के उदाहरण दिए जाते हैं. क्या वो ऐसी स्थिति भारत में पैदा करना चाहते हैं? अब संदेह हो रहा है कि विदेशी ताकतों की मदद से ये सब करवाया जा रहा है. देश के चारों स्तंभों को उखाड़कर फेंकने की कोशिश हो रही है, लेकिन जनता समझदार है. बाबासाहेब द्वारा स्थापित संस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं. कई लोगों को भारत का विकास रास नहीं आ रहा है.
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे आगे बताया कि कुछ लोग ऐसे भी हैं कि जो आज भारत की सराहना कर रहे हैं क्योंकि युद्ध जैसे हालात के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अच्छी है, जबकि कुछ देश बदहाली की स्थिति में पहुंच गए हैं. आज ये लोग जो विरोध कर रहे हैं वो विदेशी ताकतों की मदद से ऐसा कर रहे हैं.
शिंदे ने कहा, “राहुल गांधी जो बोलते हैं, वो पाकिस्तान में सुर्खियां बनता है. राहुल गांधी गलत नैरेटिव स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी को 36 देशों ने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया है, लेकिन इससे विपक्ष को परेशानी हो रही है.”
शिंदे ने कहा कि भारत के विकास में बाधा डालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन साफ है कि इनकी सत्ता नहीं आने वाली, अगले 15 साल तक भी सत्ता नहीं मिलेगी. इसी मानसिकता के चलते देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा रही है. पीएम मोदी भी समझते हैं इसलिए वो उनकी आलोचनाओं का कोई जवाब नहीं देते.
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शिंदे ने सवाल किया कि जिस तरह से सोमवार को सुप्रीम कोर्ट पर चढ़ाई की गई क्या वो सही था? देश में अब तक नहीं हुई ऐसी घटना कल हुई. अगर देश में आपातकाल होता, तो क्या ये सर्वोच्च न्यायालय तक जा पाते? उस समय तो सभी जेल में थे. आरोप लगाना और सर्वोच्च न्यायालय पर चढ़ाई करना क्या सही है?”
शिवसेना प्रमुख शिंदे ने कहा कि मुंबई में भी उमर खालिद और शरजील इमाम को रिहा करने की मांग की जा रही है, जिन पर भारत तोड़ने की बात करने का आरोप है. इसके लिए कुछ लोग शिवाजी पार्क में आंदोलन कर रहे हैं, जो कहते हैं कि बालासाहेब ठाकरे के विचार ही उनके विचार हैं.
शिंदे ने अंत में विपक्ष के दोहरे मापदंड पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, “INDIA गठबंधन ने याचिका दायर की है, जिसमें जांच और कुछ मांगें की गई हैं. पहले इन लोगों ने ही आरोप लगाया था कि मतदान इतना कैसे बढ़ गया इसमें कुछ गड़बड़ी है. अब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के माध्यम से फिर से वोट चोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं. दोनों तरफ अलग-अलग बातें करके कैसे चलेगा? यह शिव तांडव नहीं, बल्कि महादेव का अपमान था. यह सत्ता नहीं मिलने की हताशा में किया गया प्रदर्शन था.”
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सूरज ओझा 2021 से एबीपी न्यूज से जुड़े हैं. अंडरवर्ल्ड, साइबर जगत से जुड़े मामलों और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच किए जाने वाले संवेदनशील केसों पर बारीकी से नजर रखते हैं. लॉरेंस बिश्नोई गैंग, आतंकी संगठन आईएसआईएस, जैश-ए-मोहम्मद और अन्य आतंकवादी संगठनों से जुड़ी खबरें भी कवर करते रहे हैं. पत्रकारिता करियर के दौरान तीन क्षेत्रीय न्यूज़ चैनलों और दो राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों में काम किया है. इसके अलावा टैब्लॉयड और ब्रॉडशीट अख़बारों में भी काम करने का अनुभव रहा है.
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