विवाद में फंसी सम्मान में मिली सरकारी जमीन, तेलंगाना के पद्मश्री अवॉर्डी कलाकार काट रहे अफसरों के चक्कर – AajTak

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तेलंगाना के प्रसिद्ध लोक कलाकार और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित दर्शनम मोगिलैया को अपनी उस जमीन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, जो उन्हें सम्मान के तौर पर मिली थी. दर्शनम सम्मानित लोक कलाकार हैं और किन्नारा नाम का अनोखा वाद्ययंत्र बजाने वाले दुर्लभ लोगों में से एक है. किन्नारा आदिवासी परंपरा का एक वाद्ययंत्र है, जो लुप्त होने के कगार पर था, लेकिन दर्शनम मोगिलैया के प्रयासों ने इसे फिर से न सिर्फ जीवंत किया बल्कि इसे कला जगत में पहचान भी दिलाई है.
उनके इसी भगीरथ प्रयास को सम्मान देने के लिए और कला-संस्कृति के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए सरकार ने उन्होंने 600 वर्ग गज का आवासीय भूखंड दिया था. दर्शनम का आरोप है कि यह जमीन उन्हें अब तक नहीं मिल पाई है. उनका कहना है कि यह जमीन कानूनी विवाद में फंसी हुई है, जिसके कारण वह न तो उसका कब्जा ले पा रहे हैं और न ही उसके नाम पर पट्टा ही हासिल कर पा रहे हैं.
मोगिलैया ने सोमवार को जिला कलेक्टर सी. नारायण रेड्डी से प्रजावाणी कार्यक्रम के दौरान मुलाकात की और मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की. उन्होंने अधिकारियों को बताया कि सम्मान के रूप में मिली जमीन उनके लिए गर्व का विषय होनी चाहिए थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से वह सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं.
मोगिलैया के अनुसार, यह भूखंड तेलंगाना के अब्दुल्लापुरमेट मंडल के कुंतलूर गांव में है. यह जमीन उन्हें पिछली भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) सरकार के कार्यकाल में आवंटित की गई थी. बाद में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने उन्हें इस आवंटन से संबंधित सरकारी आदेश (जीओ) सौंपा था. उस समय उन्हें उम्मीद जगी थी कि अब उनका परिवार एक स्थायी संपत्ति का मालिक बन सकेगा.
हालांकि, कलाकार का आरोप है कि जमीन पर पहले से ही कानूनी विवाद चल रहा है. इसी वजह से राजस्व विभाग उन्हें स्पष्ट मालिकाना हक के दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें सम्मान दिया, लेकिन उस सम्मान का लाभ आज तक नहीं मिल सका. दर्शनम मोगिलैया ने अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा जताते हुए कहा, “मुझे सम्मान के रूप में जमीन दी गई थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से मैं उसका लाभ लेने के बजाय सरकारी कार्यालयों और अदालतों के चक्कर काट रहा हूं. जिस सम्मान से मेरे परिवार को सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वही अब मेरे लिए परेशानी का कारण बन गया है.”
उन्होंने बताया कि जमीन के मामले को सुलझाने के लिए उन्हें अब तक लगभग 9 लाख रुपये खर्च करने पड़े हैं. इसमें अदालतों में मुकदमेबाजी और वकीलों की फीस का बड़ा हिस्सा शामिल है. मोगिलैया का कहना है कि एक लोक कलाकार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने परिवार के भविष्य को देखते हुए यह संघर्ष जारी रखा.
पद्मश्री सम्मानित कलाकार ने कहा कि वह चाहते हैं कि विवाद जल्द समाप्त हो ताकि वह इस संपत्ति को अपने चार बच्चों के बीच बांट सकें और उनके भविष्य को सुरक्षित कर सकें. उनका मानना है कि जिस सम्मान को सरकार ने उनकी कला साधना की पहचान के रूप में दिया था, उसका लाभ उनके परिवार तक पहुंचना चाहिए. मोगिलैया ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पिछले दो वर्षों में इब्राहिमपट्टनम के राजस्व मंडल अधिकारी (आरडीओ) कार्यालय और अब्दुल्लापुरमेट के राजस्व अधिकारियों से कई बार संपर्क किया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला. उनका कहना है कि हर बार उन्हें आश्वासन तो मिला, लेकिन जमीन का विवाद जस का तस बना रहा.
उन्होंने जिला प्रशासन पर भी नाराजगी जताई. मोगिलैया के अनुसार, पिछले दो वर्षों में जिले में कई प्रशासनिक बदलाव हुए, कई अधिकारी आए और गए, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कलाकार होने के बावजूद उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. कलाकार ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनके मामले को प्राथमिकता नहीं दी. उनका कहना है कि अगर किसी पद्मश्री सम्मानित व्यक्ति को भी न्याय पाने के लिए इतनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ रही है, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.
हाल ही में दर्शनम मोगिलैया ने बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (केटीआर) से भी मुलाकात की थी. बताया जाता है कि केटीआर ने उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर के समक्ष यह मामला उठाने का आश्वासन दिया है.
अब मोगिलैया ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस विवाद का समाधान नहीं किया गया तो वह सीधे मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से मुलाकात करेंगे और न्याय की मांग करेंगे. उनका कहना है कि उन्होंने पूरी जिंदगी लोक कला और संस्कृति को समर्पित की है और सरकार द्वारा दिया गया सम्मान कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए.
दर्शनम मोगिलैया तेलंगाना की पारंपरिक किन्नेरा कला के सबसे बड़े कलाकारों में गिने जाते हैं. विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी इस लोक कला को पुनर्जीवित करने में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया था. ऐसे में सम्मान के रूप में मिली जमीन को लेकर उनका संघर्ष अब प्रशासनिक व्यवस्था और कलाकारों के सम्मान से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े कर रहा है.
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