केंद्र सरकार ने संसद को बताया कि व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन और जमीनी परीक्षणों से ई-20 पेट्रोल को इस्तेमाल के लिए सुरक्षित पाया गया है। …और पढ़ें
संसद का मानसून सत्र।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि सरकारी एजेंसियों, आटोमोबाइल कंपनियों और उद्योग से जुड़ी संस्थाओं की ओर से किए गए व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन और जमीनी स्तर पर किए गए परीक्षण से पुष्टि हुई है कि ई-20 पेट्रोल तय मानकों के तहत इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है।
संसद में एक लिखित जवाब में भारी उद्योग मंत्रालय ने कहा कि इस मूल्यांकन में इंजन का टिकाऊपन, गाड़ी चलाने में आसानी, ठंड में स्टार्ट होने की क्षमता, जंग से बचाव, मटीरियल की अनुकूलता, फ्यूल सिस्टम की विश्वसनीयता, उत्सर्जन और ईंधन की दक्षता जैसे मुख्य पहलुओं को शामिल किया गया था।
मंत्रालय ने बताया कि यह अध्ययन आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन आफ इंडिया (एआरएआइ), सोसाइटी आफ इंडियन आटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम), इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) और आटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों ने किया था।
मंत्रालय ने यह भी बताया कि ई-20 लागू करने से पहले 26 दिसंबर, 2020 को नीति आयोग के तहत बनी एक अंतर-मंत्रालयी समिति ने एथनाल मिलाने से जुड़ी वाहन की अनुकूलता, माइलेज और दक्षता जैसे पहलुओं की अच्छी तरह से जांच की थी। इस मूल्यांकन का आइओसीएल, एआरएआइ और सियाम ने समर्थन किया था। सरकार ने कहा कि ई-20 पेट्रोल को व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन और सफल जांच के बाद ही पेश किया गया था।
सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार को कहा कि ई-20 पेट्रोल के देशव्यापी परीक्षण में अधिक क्लोराइड या नमी होने के दावों का कोई सुबूत नहीं मिला और ईंधन की गुणवत्ता तय सीमा में पाई गई।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड और इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड ने संयुक्त बयान में बताया कि रिफाइनरियों से लिए गए 100 से अधिक पेट्रोल के नमूनों में क्लोराइड का स्तर एक पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) या उससे कम था, जबकि 80 डिस्टिलरी से लिए गए इथेनाल के नमूनों में क्लोराइड की मात्रा तीन पीपीएम से कम पाई गई।
बयान के अनुसार, देशभर के डिपो और टर्मिनल से इकट्ठा किए गए 80 से अधिक ई-20 के नमूनों में भी क्लोराइड का स्तर तीन पीपीएम से कम पाया गया। तेल कंपनियों ने कहा कि लगभग 90,000 फ्यूल स्टेशनों पर अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक की जांच में पानी अंदर जाने का कोई सुबूत नहीं मिला।
उन्होंने ग्राहकों से विश्वास के साथ ई-20 का इस्तेमाल जारी रखने की अपील की। तेल कंपनियों का कहा कि इन परीक्षणों से साबित होता है कि ई-20 पेट्रोल में 500 पीपीएम क्लोराइड और नमी होने के दावे सही नहीं हैं।