शरीर पर कोई चोट नहीं… प्रतीक यादव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई सामने, जांच के लिए हार्ट और विसरा सुरक्षित – AajTak

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की अचानक मौत के बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई है. इस रिपोर्ट में उनके शरीर पर किसी तरह की बाहरी चोट का कोई निशान नहीं मिला है. हालांकि मौत की असली वजह अब भी स्पष्ट नहीं हो सकी है. इसी कारण डॉक्टरों ने आगे की जांच के लिए विसरा सुरक्षित रख लिया है. साथ ही हार्ट को भी रख लिया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर दोबारा जांच की जा सके.
प्रतीक यादव समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के सौतेले भाई और भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति थे. आज बुधवार की सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के सिविल हॉस्पिटल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. हॉस्पिटल के अनुसार, जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.
सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम के दौरान शरीर पर चोट या संघर्ष के कोई निशान नहीं मिले. डॉक्टरों ने चेस्ट का एक्स-रे भी कराया. पोस्टमॉर्टम के लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टरों का पैनल बनाया गया था. डॉक्टर मौसमी सिंह के नेतृत्व में हुई इस प्रक्रिया में फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉक्टर अनूप कुमार रायपुरिया और डॉक्टर फातिमा हर्षा भी शामिल रहे. पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई.
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प्रतीक यादव का वजन काफी बढ़ गया था. इसी वजह से डॉक्टरों ने हार्ट को भी सुरक्षित रखा है. अगर प्राथमिक जांच में हार्ट अटैक मौत की वजह के रूप में सामने आता है और आगे दोबारा जांच की जरूरत पड़ती है, तो हार्ट से मदद ली जाएगी. विसरा को जांच के लिए भेजा जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि शरीर में किसी प्रकार के विषैले तत्व या अन्य कारण मौजूद थे या नहीं.
अस्पताल प्रशासन ने कहा- सस्पेक्टेड पॉइजनिंग जैसी कोई बात नहीं
इस बीच सिविल अस्पताल प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि अस्पताल की ओर से कभी भी सस्पेक्टेड पॉइजनिंग की बात नहीं कही गई. अस्पताल के निदेशक जीपी गुप्ता ने बताया कि सुबह करीब साढ़े पांच बजे प्रतीक यादव के ड्राइवर अस्पताल पहुंचे थे और डॉक्टर को तुरंत चलने के लिए कहा था. मेडिकल टीम मौके पर गई, लेकिन उस समय शरीर में कोई प्रतिक्रिया नहीं थी. बाद में उन्हें अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
निदेशक के मुताबिक, परिवार के सदस्य पहले शव को घर ले जाना चाहते थे, लेकिन बाद में उन्होंने खुद पोस्टमॉर्टम कराने की इच्छा जताई. इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और पंचनामा कर शव को केजीएमयू भेजा गया. अस्पताल ने यह भी स्पष्ट किया कि पॉइजनिंग की आशंका संबंधी जो बातें सामने आ रही हैं, वे उनकी ओर से जारी नहीं की गईं.
अखिलेश यादव ने कहा- दो महीने पहले प्रतीक से हुई थी मुलाकात
प्रतीक यादव की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है. अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतीक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक थे और अपना बिजनेस संभालते थे. उन्होंने कहा कि कई बार व्यापार में नुकसान होने से व्यक्ति मानसिक रूप से प्रभावित हो सकता है. अखिलेश ने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक से मुलाकात हुई थी और उन्होंने उन्हें बिजनेस पर ध्यान देने की सलाह दी थी. उन्होंने प्रतीक को बेहद अच्छा इंसान बताया.
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सूत्रों के अनुसार, प्रतीक यादव पहले भी लीवर और लंग्स से जुड़ी समस्याओं के चलते कई बार अस्पताल में भर्ती हो चुके थे. हालांकि कभी लंबे समय तक भर्ती नहीं रहे. तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए लाया जाता था और एक-दो दिन में डिस्चार्ज कर दिया जाता था.
वहीं, लखनऊ पुलिस के डीसीपी सेंट्रल विक्रांत वीर ने बताया कि पुलिस ने फिलहाल प्रतीक का मोबाइल फोन या लैपटॉप अपने कब्जे में नहीं लिया है. यदि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या आगे की जांच में किसी तरह की संदिग्ध परिस्थिति सामने आती है, तभी आगे कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी. फिलहाल पोस्टमॉर्टम की शुरुआती रिपोर्ट ने शरीर पर चोट के निशान न मिलने की पुष्टि की है, लेकिन मौत की असली वजह जानने के लिए अब विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.
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