शिप्रा आरती से हटाने का विरोध…जल सत्याग्रह करेगी पंडा समिति: उज्जैन में पहली बार शिप्रा आरती पर विवाद, 3 … – Dainik Bhaskar

उज्जैन में पहली बार हरिद्वार और बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर शिप्रा आरती करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पूरे मामले में तीन दिन से चल रहे गतिरोध के बीच पंडे-पुजारी और प्रशासन आमने-सामने हैं। कई लोगों का कहना है कि देश में पहली बार ऐसा हो रहा है,
सबसे पहले जानिए, विवाद की शुरुआत कैसे हुई
बीते 11 सालों से शिप्रा नदी के रामघाट पर पंडा समिति शाम 6:30 बजे आरती का आयोजन कर रही है। इसे बनारस और हरिद्वार की तर्ज पर और भव्य बनाने के लिए प्रशासन कई दिनों से पहल कर रहा था। ऐसे में शिप्रा आरती का आयोजन अचानक महाकाल मंदिर समिति को दे दिया गया।
5 अगस्त को महाकाल मंदिर समिति ने महाकाल थाने सहित प्रशासन को पत्र जारी कर आरती के लिए सुरक्षा और जरूरी सामान उपलब्ध कराने की मांग की। शाम 5 बजे महाकाल मंदिर के बटुकों के साथ मंदिर समिति के लोग शिप्रा आरती के लिए रामघाट पहुंचे। इसकी जानकारी मिलते ही पंडा समिति के लोगों ने उन्हें रोक दिया।
कुछ देर तक विवाद चलता रहा। इसके बाद पंडा समिति और प्रशासन के बीच भी गतिरोध बना रहा। अंत में मंदिर समिति के बटुकों को रामघाट पर दूसरी जगह आरती करनी पड़ी।
विवाद में हुआ क्या
दो दिन तक चले गतिरोध के बाद 7 अगस्त को पंडा समिति ने महाकाल मंदिर समिति के बटुकों को रामघाट पर किसी भी जगह आरती करने से मना कर दिया। इस दौरान भारी पुलिस बल और दो एसडीएम ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने।
करीब एक घंटे से अधिक समय तक समझाने के बाद भी विवाद नहीं थमा और पंडा समिति के लोग अपनी बात पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिस ने बलपूर्वक पंडा समिति के पुजारियों को वहां से हटा दिया और मंदिर समिति के बटुकों से रामघाट पर दूसरी जगह आरती करवाई।
अब आगे क्या
तीन दिन से लगातार शिप्रा आरती को लेकर चल रहे गतिरोध के बीच शुक्रवार को पुलिस द्वारा बलपूर्वक हटाए जाने के विरोध में पंडा समिति ने शनिवार शाम शिप्रा नदी में जल सत्याग्रह करने का निर्णय लिया है। पंडा समिति के लोग शाम 4 बजे शिप्रा नदी के जल में उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
दोनों पक्षों का तर्क भी समझ लीजिए
एसडीएम पवन बारिया ने कहा कि सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को हरिद्वार जैसी आरती देखने को मिले, इसलिए नई शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि महाकाल प्रबंध समिति की ओर से एक नई शुरुआत की जा रही है। जैसे हरिद्वार में गंगा मैया की आरती होती है, उसी तर्ज पर यहां भी महाकाल प्रबंध समिति ने शिप्रा नदी के किनारे आरती शुरू करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि इसमें किसी को रोकने जैसी बात नहीं है और न ही किसी को हटाया जा रहा है। मंदिर समिति आरती की नई शुरुआत कर रही है और यहां नवाचार किया जा रहा है। जब यह आरती होगी तो यहां काफी भव्यता रहेगी।
पंडा समिति बोली- 11 साल बाद अचानक कैसे बदला निर्णय
पंडा समिति के राजेश त्रिवेदी ने कहा कि साल 2015 से लगातार तीर्थ पुरोहित शिप्रा आरती कराते आ रहे हैं। पिछले वर्षों में आरती के स्वरूप में भी बदलाव किया गया और इसे भव्य बनाया गया। उन्होंने कहा कि 11 साल बाद अचानक महाकाल मंदिर समिति को आरती की जिम्मेदारी देना पुरोहितों को बाहर करने जैसा है। त्रिवेदी ने कहा कि पुरोहित हर हाल में आरती खुद ही करेंगे और महाकाल मंदिर समिति को आरती नहीं करने देंगे।
उन्होंने प्रशासन से अपना काम करने और पुरोहितों को अपना काम करने देने की बात कही। विरोध के दौरान उन्होंने कहा कि वे कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे।
एसडीएम बोले- साथ आरती करने का प्रस्ताव दिया था
एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि प्रशासन ने पंडा समिति के पुरोहितों से कहा था कि वे भी महाकाल मंदिर समिति के बटुकों के साथ आरती में शामिल हो जाएं, ताकि दोनों मिलकर आरती कर सकें। हालांकि, पुरोहित इसके लिए तैयार नहीं हुए।
एसडीएम के मुताबिक अब रोजाना शिप्रा आरती महाकाल मंदिर समिति की ओर से कराई जाएगी। शनिवार शाम को भी रामघाट पर आरती होगी।
निजी एजेंसी के जरिए भव्य आरती की तैयारी
उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड (यूएससीएल) ने शिप्रा आरती को भव्य सांस्कृतिक इवेंट बनाने के लिए हाल ही में निविदा आमंत्रित की है। इस टेंडर का उद्देश्य निजी एजेंसी के माध्यम से आरती का पेशेवर प्रबंधन, ब्रांडिंग और डिजिटल प्रचार-प्रसार करना है।
स्मार्ट सिटी की ओर से जारी इस टेंडर का नाम ‘उज्जैन में मां शिप्रा आरती का आयोजन’ है। इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत किया जाएगा। स्मार्ट सिटी के सीईओ संदीप शिवा ने बताया कि चुनी गई निजी एजेंसी सार्वजनिक-निजी भागीदारी के आधार पर यूनिटी मॉल के पीछे स्थित शिप्रा के घाट पर दैनिक और विशेष आरती का संचालन करेगी।
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शिप्रा आरती पर बवाल-पुरोहितों को पुलिस ने घाट से हटाया:11 साल से करा रहे थे आरती
उज्जैन के रामघाट पर रोजाना होने वाली शिप्रा आरती को लेकर शुक्रवार शाम प्रशासन और तीर्थ पुरोहित आमने-सामने आ गए। करीब 11 साल से शिप्रा किनारे पूजन-पाठ कराने वाले तीर्थ पुरोहित आरती कराते आ रहे हैं। अब महाकाल मंदिर समिति की ओर से बटुकों को आरती की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद विवाद बढ़ गया।
शुक्रवार शाम करीब 6 बजे महाकाल मंदिर समिति के बटुक रामघाट पर आरती की तैयारी करने पहुंचे। जैसे ही घाट पर पाट बिछाने का काम शुरू हुआ, पंडा समिति के पुरोहितों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। विवाद की स्थिति को देखते हुए एसडीएम एलएन गर्ग, पवन बारिया और महाकाल थाना पुलिस का बल पहले से घाट पर मौजूद था। पढ़ें पूरी खबर…
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