उत्तर भारत की सबसे बड़ी हिंदी साहित्य बिना कार्यकारिणी समिति व संचालन समिति के चल रही है। फिलहाल समिति गंभीर प्रशासनिक और आर्थिक संकट से गुजर रही है। स्थिति यह है कि समिति में लंबे समय से कोई जिम्मेदार पदाधिकारी सक्रिय नहीं है। संचालन समिति और अन्य प
दान की किताबों से लेकर नीलामी तक का सफर तय करने वाली हिंदी साहित्य समिति ने कई दौर देखे हैं। 114 साल पुरानी हिंदी साहित्य समिति पर कभी नीलामी का नोटिस भेजा गया था, जिसके बाद से हिंदी साहित्य समिति राज्य सरकार के अधीन है। ऐसे में हिंदी साहित्य समिति के उत्थान के लिए पुन: शुरू करने के लिए लाखों रुपए की लागत से काम कराए गए, लेकिन बिना संचालन समिति के समिति का संचालन चल रहा है। ऐसे में किसी भी पद पर व्यक्ति की नियुक्ति न होने से सभी व्यवस्था चरमरा रही हैं।
ई-केवाईसी कराने तक के लिए कर्मचारी नहीं
हिंदी साहित्य समिति के संचालन के लिए 2 दुकानें किराए पर दे रखीं हैं। खाते के संचालन को लेकर आवश्यक दस्तावेज और अधिकृत हस्ताक्षर उपलब्ध नहीं होने के कारण बैंक ने लेन-देन पर रोक लगा दी। जिसकी वजह है कि एक भी व्यक्ति की नियुक्ति नहीं होना।
संचालन समिति में ये पद हैं खाली
सहायक कर्मचारी, पुस्तकालय अध्यक्ष, कनिष्क सहायक, रात्रि कालीन चौकीदार इन चारों पदों में से एक भी व्यक्ति की नियुक्ति समिति में पद होने के बावजूद भी नहीं की गई है।
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