संभल: सत्यव्रत पुलिस चौकी को वक्फ की जमीन पर बनाने का दावा करने वालों पर FIR, ओवैसी से लेकर सपा ने उठाया था मामला – Aaj Tak

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संभल में शाही जामा मस्जिद के पास निर्माणाधीन सत्यव्रत पुलिस चौकी को वक्फ बोर्ड की जमीन पर बनाने का दावा करने वालों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मणिभूषण तिवारी की तरफ से संभल कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है. 
संभल प्रशासन की ओर से ओवैसी द्वारा पोस्ट किए गए दस्तावेज फर्जी साबित किए जाने के बाद संभल कोतवाली में बीएनएस की धारा 419, 420, 467, 467, 471 के तहत अज्ञात के खिलाफ ये मुकदमा दर्ज हुआ है. इस एफआईआर में सपा के डेलीगेशन के संभल आने पर संभल विधायक के द्वारा एक अधिवक्ता के जरिए निर्माणाधीन पुलिस चौकी के दस्तावेज डेलीगेशन के सामने रखने और दस्तावेजों के साथ वक्फ से संबंधित दस्तावेज संलग्न होने का जिक्र किया गया है.  
ओवैसी ने क्या दावा किया था? 
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी X पर दावा किया था कि संभल में जामा मस्जिद के पास जो पुलिस चौकी बनाई जा रही है, वो वक्फ की जमीन पर है, जैसा कि रिकॉर्ड में दर्ज है. औवैसी ने दावा करते हुए जमीन के दस्तावेज शेयर कर लिखा है कि यह वक्फ नंबर 39-A मुरादाबाद है. यह उस जमीन का वक्फनामा है, जिस पर पुलिस चौकी का निर्माण हो रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार को क़ानून का कोई एहतराम नहीं है.  
संभल की जामा मस्जिद के पास जो पुलिस चौकी बनाई जा रही है, वह वक्फ की जमीन पर है, जैसा कि रिकॉर्ड में दर्ज है। इसके अलावा, प्राचीन स्मारक अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारकों के पास निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। @narendramodi और @myogiadityanath संभल में खतरनाक माहौल बनाने के…
AIMIM चीफ ओवैसी ने कहा कि प्राचीन स्मारक अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारकों के पास निर्माण कार्य प्रतिबंधित है. ओवैसी ने आरोप लगाया कि संभल में खतरनाक माहौल बनाने के लिए नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ जिम्मेदार हैं.  
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डीएम बोले- दस्तावेज पूरी तरह फर्जी 
गुरुवार को संभल के डीएम और एसपी के द्वारा प्रेस कांफ्रेंस किए जाने के बाद ये कार्रवाई हुई है. डीएम राजेंद्र पैंसिया ने आजतक से बातचीत के दौरान कहा कि विवादित धर्मस्थल के सामने सत्यव्रत पुलिस चौकी के निर्माण वाली जमीन से संबंधित एक दस्तावेज डेलीगेशन के माध्यम से हमारे पास आया था. उस दस्तावेज का जब परीक्षण कराया गया तो वो दस्तावेज एकदम फर्जी प्रतीत होता है. उन्होंने बताया कि इस दस्तावेज के आधार पर विवादित स्थल से 7 किलोमीटर तक सभी सरकारी और गैर सरकारी इसके अलावा धार्मिक स्थल की प्रॉपर्टी भी वक्फ की हो गई है. 
डीएम ने कहा कि शासन और प्रशासन हमेशा तथ्यों के आधार पर बात करता है. हमारे पास भी जब इस तरह की दस्तावेज सोशल मीडिया के जरिए आने लगे तो हमने इसका परीक्षण कराया, लेकिन कोई भी तथ्य और प्रमाण उनके पक्ष में नहीं हैं. जिस जगह पर पुलिस चौकी बन रही है उससे संबंधित कोई भी प्रमाण इन लोगों के पास मौजूद नहीं है. 
संभल के एसपी केके बिश्नोई ने क्या बताया? 
एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि डीएम संभल के द्वारा त्रिस्तरीय एक कमेटी गठित की गई थी. डेलिगेशन के द्वारा दिए गए दस्तावेज की जब जांच की गई तो उसके रजिस्टर्ड होने की बात सामने नहीं आई. अगर इस तरह से देखा जाएगा तो संभल कोतवाली भी वक्फ की जमीन का ही पार्ट होगा. बिना किसी आधार के यह सभी डॉक्यूमेंट दिए गए थे और उनकी जांच पड़ताल करने के बाद इस मामले में अभियोग पंजीकृत करने की संस्तुति की गई थी. इस मामले में अज्ञात के खिलाफ संभल कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है.
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