उत्तराखंड संस्कृत संस्थान की ओर से आयोजित 18वें संस्कृत महोत्सव के तहत जनपद स्तरीय संस्कृत स्पर्धा के पहले दिन कनिष्ठ वर्ग की विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए गए। संस्कृत नाटक में मारवाड़ कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज रुड़की ने प्रथम, आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज रुड़की ने द्वितीय और जगत देव सिंह संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय हरिद्वार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। संस्कृत समूहनृत्य में आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज रुड़की प्रथम, आचार्यकुलम पतंजलि योगपीठ हरिद्वार द्वितीय और स्वामी शम्भूदेव संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय खड़खड़ी तृतीय रहा। संस्कृत समूहगान में पतंजलि गुरुकुलम् रुड़की ने पहला, आचार्यकुलम पतंजलि योगपीठ ने दूसरा और डीएवी सेंटेनरी पब्लिक स्कूल हरिद्वार ने तीसरा स्थान हासिल किया।
संस्कृत वाद-विवाद में आचार्यकुलम पतंजलि योगपीठ के शौर्यराज और गौरिका प्रथम, श्री जगद्गुरु श्री चन्द्र संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय के रश्मि और नव्या द्वितीय तथा आर्य कन्या पाठशाला रुड़की की आरुषि और अनुकृति तृतीय रहीं। संस्कृत आशुभाषण में जगत देव सिंह संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय के अथर्व ढौंढियाल प्रथम, श्री जगद्गुरु श्री चन्द्र संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय के अक्षित बडोनी द्वितीय और आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज रुड़की की प्राची तृतीय रहीं। संस्कृत श्लोकोच्चारण में आचार्यकुलम पतंजलि योगपीठ की सोनाक्षी प्रथम, श्री जगद्गुरु श्री चन्द्र संस्कृत उत्तर मध्यमा विद्यालय के अनिरुद्ध बहुखंडी द्वितीय और आरएनआई इंटर कॉलेज भगवानपुर की तनिष्का शर्मा तृतीय रहीं। उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के प्रेक्षागृह में आयोजित उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता मुख्य शिक्षा अधिकारी अमित कुमार चंद ने की। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा संस्कृति की जननी है और जीवन में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। संस्थान के सचिव प्रो. विनय विद्यालंकार ने कहा कि प्रतियोगिताओं में कम उम्र में विद्यार्थियों की भागीदारी उत्साहजनक है। संस्कृत शिक्षा निदेशालय के उपनिदेशक डॉ. वाजश्रवा आर्य ने विचार रखे। इस अवसर पर डॉ. हरीश चंद्र गुरुरानी, डॉ. केशव दत्त बलियानी, जनपद संयोजक डॉ. विजय कुमार त्यागी, डॉ. नवीन चंद्र पंत, डॉ. हरीश तिवारी, डॉ. कंचन तिवारी, डॉ. द्विजेंद्र शर्मा, दीपमाला शर्मा, डॉ. दामोदर परंगाई, डॉ. रवींद्र आर्य, डॉ. अरविंद नारायण मिश्र, आशीष बजाज, डॉ. योगेश शास्त्री आदि मौजूद थे।
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