सऊदी के दौरे पर जाएंगे पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ, जानिए किन मुद्दों पर होगी चर्चा – AajTak

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के इनविटेशन पर अगले 48 घंटों के अंदर सऊदी अरब की यात्रा कर सकते हैं. इस हाई लेवल विजिट के दौरान शहबाज प्रमुख क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बातचीत करेंगे. यह यात्रा इस्लामाबाद में शनिवार और रविवार को हुई उस ऐतिहासिक वार्ता के ठीक बाद हो रही है, जिसे 1979 की ईरानी क्रांति के बाद दोनों पक्षों के बीच सबसे बड़ी चर्चा माना गया है. 
प्रधानमंत्री शहबाज के साथ रक्षा बलों के प्रमुख आसिम मुनीर, उप प्रधानमंत्री इशाक डार और सैयद तारिक फातेमी भी मौजूद रहेंगे. सऊदी अरब और कतर ने पाकिस्तान को 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता देने का वादा किया है, जिस पर इस दौरान विस्तार से बातचीत होगी. 
गौर करने वाली बात है कि सितंबर 2025 में रियाद और इस्लामाबाद ने एक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत हाल ही में 13,000 पाकिस्तानी सैनिकों और लड़ाकू विमानों की एक टुकड़ी सऊदी अरब के किंग अब्दुलअज़ीज़ एयर बेस पर तैनात की गई है.
वित्तीय सहयोग और 5 बिलियन डॉलर की मदद
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस दौरे में आर्थिक मुद्दे काफी अहम रहने वाले हैं. सऊदी अरब और कतर द्वारा पाकिस्तान को दिए जाने वाले 5 बिलियन डॉलर के फाइनेंशियल सपोर्ट पैकेज पर चर्चा प्रमुखता से फीचर होगी. वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब भी अमेरिका से सीधे रियाद पहुंचकर इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बन सकते हैं, जिससे आर्थिक रोडमैप को अंतिम रूप दिया जा सके.
यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच पिछले हफ्ते शुरू हुए सीजफायर के बीच हो रहा है. छह हफ्तों तक चली जंग के बाद अब दोनों देश क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति बहाल करने पर ध्यान दे रहे हैं. शहबाज और क्राउन प्रिंस के बीच होने वाली यह मुलाकात खाड़ी क्षेत्र में शांति बनाए रखने और भविष्य की कूटनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
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पाकिस्तानी सेना की सऊदी में तैनाती
संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान ने हाल ही में अपने 13,000 सैनिकों और करीब 18 लड़ाकू विमानों को सऊदी अरब भेजा है. सऊदी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इस तैनाती का मकसद दोनों देशों के बीच सैन्य समन्वय बढ़ाना और परिचालन तत्परता में सुधार करना है. यह दशकों पुरानी सुरक्षा साझेदारी को और गहरा करने के संकल्प को दर्शाता है जिसमें एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा.
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