भारत में ज्यादातर लोग रेंट एग्रीमेंट पर सिर्फ साइन कर देते हैं- पढ़ने की फुर्सत या आदत कम ही होती है। दिल्ली के सत्यनिकेतन में हुए PG हादसे के बाद सामने आया एक एग्रीमेंट इसी लापरवाही का खतरनाक नतीजा दिखाता है। पीजी मालिक ने किराएदारों से यह लिखवा रखा था कि अगर भवन में कोई हादसा होता है और उससे मौत भी हो जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी PG ऑफिशियल्स की नहीं होगी। यह शर्त न सिर्फ कानूनी तौर पर विवादास्पद है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या ऐसे “छूट पत्र” वास्तव में मालिक को सुरक्षा की जिम्मेदारी से मुक्त कर सकते हैं, या फिर ये सिर्फ कागजी ढाल हैं जो हादसे के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय की राह से भटका देती हैं।
दक्षिण दिल्ली के पॉश इलाके सत्या निकेतन में रविवार दोपहर ढही पांच मंजिला पीजी इमारत हादसे में मौतों का आंकड़ा 7 हो गया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद अब किराएदारों के साथ किए गए रेंट एग्रीमेंट की कॉपी सामने आई है, जिसने बिल्डिंग मालिकों की मनमानी और छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एग्रीमेंट की कॉपी में साफ तौर पर लिखा था, “पीजी अधिकारी/मकान मालिक मेरे (किराएदार) साथ होने वाली किसी भी अनहोनी, दुर्घटना या जानमाल के जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।” अब जब यह पांच मंजिला इमारत ढह गई है, तो ऐसे में एग्रीमेंट में की गई इस शर्त एक बड़ा महत्तव है।
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
इमारत का मालिक हरिराम हादसे के बाद से ही फरार है। पुलिस ने उसके खिलाफ ‘लुक आउट सर्कुलर’ (LOC) जारी किया है और कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
रविवार दोपहर करीब 1:15 से 1:30 बजे के बीच हुए इस हादसे के बाद NDRF और दिल्ली पुलिस की टीमों ने मलबे से 11 छात्रों को सुरक्षित निकाला, जबकि 7 छात्रों की अस्पताल में मौत हो गई।
स्थानीय भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि इमारत लगभग 40 साल पुरानी थी और उसमें 13 छात्र और 3-4 मजदूर मौजूद थे।
हादसे के कारणों की शुरुआती जांच में मरम्मत कार्य और जलभराव को मुख्य वजह माना जा रहा है।
विधायक अनिल शर्मा ने आरोप लगाया कि पुरानी इमारत के बेसमेंट या ग्राउंड फ्लोर पर बिना अनुमति के तोड़फोड़ और मरम्मत का काम चल रहा था, जिसमें मकान मालिक ने भार उठाने वाली मेन दीवार को कमजोर बनवाया था या फिर उसे तोड़ दिया था।
वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर बताया कि बेसमेंट में पानी भरा हुआ था। सीलन और पुराने ढांचे में बेसमेंट के छेड़छाड़ के कारण पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। MCD ने पास की संपत्ति संख्या 13 को भी खतरनाक घोषित कर 3 दिनों में गिराने का आदेश दिया है।
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