Published By: Anjali Karmakar | Updated: Jul 14, 2026, 9:57 PM
हिंद महासागर में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों और चीन की आक्रामक समुद्री गतिविधियों के बीच भारतीय नौसेना को एक और बड़ी ताकत मिल गई है. भारत ने अपने छठे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरी को नौसेना में शामिल कर लिया है. यह अत्याधुनिक वॉरशिप न सिर्फ दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम है, बल्कि हवा, समुद्र और सबमरीन से होने वाले हमलों का एक साथ जवाब देने की क्षमता भी रखता है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में INS महेंद्रगिरी को भारतीय नौसेना की ईस्टर्न फ्लीट में कमीशन किया.
INS महेंद्रगिरी Project 17A के तहत विकसित नीलगिरी क्लास का एडवांस्ड स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है. इसे भारत में ही डिजाइन और तैयार किया गया है. इस वॉरशिप में करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक और उपकरण लगाए गए हैं, जो 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी मजबूती देते हैं. लगभग 6,670 टन वजनी यह वॉरशिप 149 मीटर लंबा है. करीब 28 नॉट (लगभग 52 किमी/घंटा) की रफ्तार से समुद्र में दौड़ सकता है.
Project 17A भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट कार्यक्रम है. इसके तहत कुल 7 नीलगिरी क्लास फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं. इनमें INS नीलगिरी, उदयगिरी, हिमगिरी, तारागिरी, दुनागिरी, महेंद्रगिरी और विंध्यगिरी शामिल हैं. इन जहाजों का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने किया है. यह प्रोजेक्ट भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का बड़ा उदाहरण माना जाता है.
INS महेंद्रगिरी की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टील्थ तकनीक है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान बेहद मुश्किल हो जाती है. जहाज की बाहरी संरचना, विशेष कोटिंग और कम रडार सिग्नेचर इसे पारंपरिक वॉरशिप से अलग बनाते हैं. यही वजह है कि यह दुश्मन के इलाके के करीब पहुंचकर भी आसानी से ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है. आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम इसे मिसाइल और रडार आधारित खतरों से भी बेहतर सुरक्षा देते हैं.
महेंद्रगिरी को मल्टी-मिशन वॉरशिप के रूप में तैयार किया गया है. यह वॉरशिप कई तरह के आधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस है. इसमें लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइलें, एंटी-शिप मिसाइलें, अत्याधुनिक गन सिस्टम, टॉरपीडो और एंटी सबमरीन हथियार मौजूद हैं. इसके साथ ही इसमें हेलीकॉप्टर संचालन की भी सुविधा है, जिससे समुद्री निगरानी और सबमरीन की खोज और भी प्रभावी हो जाती है. आधुनिक रडार और सेंसर सिस्टम इसे एक साथ कई लक्ष्यों पर नजर रखने और जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम बनाते हैं.
भारतीय नौसेना के सामने सबसे बड़ी चुनौती हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी है. चीन लगातार अपने वॉरशिप, सबमरीन और रिसर्च वेसल इस क्षेत्र में भेज रहा है. दूसरी ओर पाकिस्तान अपनी नौसेना को आधुनिक बनाने में जुटा है. ऐसे में INS महेंद्रगिरी जैसे अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना की निगरानी और युद्ध क्षमता को कई गुना बढ़ाते हैं.
INS महेंद्रगिरी का शामिल होना केवल एक नया युद्धपोत मिलने भर की बात नहीं है. यह भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत भारतीय नौसेना को ब्लू वॉटर नेवी बनाया जा रहा है. ब्लू वॉटर नेवी का मतलब ऐसी नौसेना से है, जो अपने तटीय इलाकों तक सीमित न रहकर दुनिया के किसी भी समुद्री क्षेत्र में लंबे समय तक प्रभावी अभियान चला सके.
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