सरकारी स्कूलों की छतों पर चमकेगी सूरज की रोशनी – Live Hindustan

गुरुग्राम, साक्षी रावत। जिले के सरकारी स्कूल जल्द ही सौर ऊर्जा से रोशन होते नजर आएंगे। स्कूलों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। शुरुआती चरण में जिले के एक दर्जन से अधिक सरकारी स्कूलों की छतों पर सोलर प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए स्कूल भवनों की छतों की क्षमता और उपयुक्तता का तकनीकी आकलन किया जाएगा। योजना के लागू होने के बाद स्कूलों में पंखे, कूलर, कंप्यूटर, स्मार्ट कक्षाओं के उपकरण और अन्य विद्युत संसाधनों को सौर ऊर्जा से संचालित किया जा सकेगा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से स्कूलों का डाटा जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला स्तर पर उपमंडल अधिकारी और कनिष्ठ अभियंता की टीम स्कूल परिसरों का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के दौरान छत के क्षेत्रफल, धूप की उपलब्धता और सोलर संयंत्र लगाने की संभावनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद संबंधित जानकारी पीएम सूर्य घर पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
गुरुग्राम के अधिकांश सरकारी स्कूलों में गर्मियों के दौरान बिजली की खपत काफी बढ़ जाती है। पंखे, कूलर, कंप्यूटर लैब और डिजिटल कक्षाओं के संचालन पर हर माह अच्छा-खासा बिजली खर्च आता है। सोलर प्लांट लगने के बाद स्कूलों की बिजली पर निर्भरता कम होगी और खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। बचाई गई राशि का उपयोग विद्यालयों में अन्य शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं के विकास पर किया जा सकेगा।
जिले के कई सरकारी स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं और डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध हैं। बिजली बाधित होने की स्थिति में इनके संचालन पर असर पड़ता है। सौर ऊर्जा उपलब्ध होने से डिजिटल शिक्षा गतिविधियों को निरंतर बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण वातावरण मिल सकेगा।
विद्यार्थियों को मिलेगा पर्यावरण संरक्षण का संदेश: शिक्षा विभाग का मानना है कि सौर ऊर्जा परियोजना केवल बिजली बचत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि विद्यार्थियों में नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी। स्कूल परिसर में लगे सोलर पैनल बच्चों के लिए एक व्यवहारिक शिक्षण मॉडल के रूप में काम करेंगे, जिससे वे स्वच्छ ऊर्जा के महत्व को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
पहले से लगे हैं कुछ स्कूलों में संयंत्र: जिले के कुछ सरकारी स्कूलों में पहले से सोलर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हैं और उनके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब विभाग इस व्यवस्था का विस्तार अन्य स्कूलों तक करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से अधिक से अधिक स्कूलों को इस योजना से जोड़ा जाएगा ताकि भविष्य में सरकारी विद्यालय ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकें।
प्रदेश में 300 स्कूलों को योजना से जोड़ने की तैयारी: प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। प्रारंभिक स्तर पर करीब 300 सरकारी स्कूलों में सोलर पैनल लगाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक स्कूल की छत का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। दिशा-निर्देशों के अनुसार 10 वर्ग मीटर छाया-मुक्त छत पर एक किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया जा सकता है। स्कूल भवन की उपलब्ध छत के आधार पर पांच किलोवाट तक क्षमता वाले संयंत्र लगाए जाने की योजना है। सभी स्कूलों का डाटा पीएम सूर्य घर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। चयनित स्कूलों में सौर ऊर्जा उत्पादन शुरू होने से बिजली की खपत और खर्च दोनों में कमी आने की उम्मीद है।
सरकारी स्कूलों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में विभाग द्वारा आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार स्कूल भवनों की छतों की क्षमता और उपयुक्तता का आकलन कराया जाएगा। सोलर प्लांट स्थापित होने से स्कूलों के बिजली खर्च में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही विद्यार्थियों को नवीकरणीय ऊर्जा के महत्व को समझने का अवसर मिलेगा। जिला स्तर पर सभी आवश्यक सूचनाएं एकत्र कर निर्धारित पोर्टल पर अपलोड की जा रही हैं।
– इंदू बोकन, जिला शिक्षा अधिकारी
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