महोबा। संत कबीर अमृतवाणि सत्संग में गुरु की महिमा का बखान किया गया। कबीर के विचारों को समाज की रुढियों को मिटाने के लिए कारगार बताया गया। साहित्यकारों द्वारा रचनाएं व भजन प्रस्तुत किए गए। रविवार को संत कबीर अमूतवाणि सत्संग की शुरुआत कबीर वंदना जय कबीर-जय कबीर जय गुरु कबीरा दास तोरे द्वार खड़े उनकी हरो पीड़ा से किया गया। बांदा जिले के भरकरी गांव के कबीर गद्दी के महंत त्यागी दास ने कहा कि कबीर के विचार समाज के रुढियां मिटाने में कारगार साबित हो रहे हैं। कबीर ने निष्पक्ष होकर समाज की रुढियों को दूर किया और समानता का संदेश दिया।
उन्होंने कबिरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर, न काहू से दोस्ती न काहू से बैर की विस्तार से व्याख्या की। इस मौके पर डॉ0एलसी अनुरागी ने कहा कि गुरु बुराईयों से निकालकर अच्छाईयों के मार्ग पर ले जाता है इसलिए गुरु का स्थान भगवान से भी ऊपर है। उन्होंने माता-पिता की सेवा पुनीत कार्य बताते हुए कहा कि कलयुग में लोग माता पिता का तिरस्कार कर रहे हैं। माता-पिता का अपमान करने वाले जीवन में कभी खुश नही रह सकते। इस मौके पर रामऔतार सेन ने कबीर भजन कबीरा कब भजहो सतनाम सुनाया। पं0जगदीश रिछारिया, पं0अवधेश अवस्थी, हरिश्चंद्र वर्मा, कामता प्रसाद चौरसिया, मदन पाल एडवोकेट,रामदीन अनुरागी, कमलापत, राजाराम चौरसिया आदि मौजूद रहे।
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