सलमान रुश्दी की किताब द सैटेनिक वर्सेज ले चुका है 12 मुसलमानों की जान; भारत में फिर हटी पाबन्दी – Zee News Hindi

Salman Rushdie Book Controversy: मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान सलमान रुश्दी की विवादित किताब ‘द सैटेनिक वर्सेज’ से बैन हटा लिया गया है. जिसके बाद यह किताब एक बार फिर भारत में बिकने लगी है. 
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Salman Rushdie Book Controversy:  पूर्व पीएम राजीव गांधी की सरकार ने 36 साल पहले सलमान रुश्दी की विवादित किताब ‘द सैटेनिक वर्सेज’ पर बैन लगा दिया था. तब से भारत में उसकी बिक्री पर रोक लग गई थी, लेकिन अब मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान इस किताब से बैन हटा लिया गया है. जिसके बाद यह किताब एक बार फिर भारत में बिकने लगी है. जिसकी वजह से देश की सियासत गरमा गई है. मुस्लिम समुदाय के लोग पीएम नरेंद्र मोदी से इस किताब पर बैन लगाने की मांग कर रहे हैं.

‘ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड’ के राष्ट्रीय महासचिव अल्लामा बुनाई हसनी ने कहा, “बहुत अफसोस की बात है कि जो किताब समाज में अमन-शांति को भंग करता है, जिसको बहुत पहले भारत सरकार ने बैन कर दिया था, अब उस पर से यह पाबंदी हटा ली गई है. किसी आदमी ने इस किताब से पाबंदी हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की थी और कोर्ट ने उसकी अपील को स्वीकार करने के लिए किताब से पाबंदी हटा दी है.”

किताब समाज में करता है शांति भंग
उन्होंने आगे कहा, “जो किताब समाज में अमन-शांति को भंग करता है, उसको हमारे समाज में खुलेआम नहीं बिकना चाहिए. इस किताब को रखने और बेचने की कोई गुंजाइश नहीं है. किताब को भारत जैसे अमन और शांतिप्रिय देश में बिकने की इजाजत देना बहुत ही अफसोसनाक है. इसलिए हमारी सरकार से अपील है कि इस किताब पर देश में पाबंदी लगा दी जाए.”

अब तक इतने किताबों पर लगाई जा चुकी है पाबंदी
रजा अकादमी के अध्यक्ष सईद नूरी ने भी ‘द सैटेनिक वर्सेज’ किताब पर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, “सरकार अपनी मंशा कोर्ट को बताती है और कोर्ट उसी प्रकार से अपना फैसला सुनाती है. साल 1924 से लेकर 2017 तक देश में 50 से ज्यादा किताबों पर पाबंदी लगाई जा चुकी है, लेकिन ‘द सैटेनिक वर्सेज’ से ही पाबंदी हटाना बहुत अफसोसजनक है.”
किताब पर सरकार लगाए बैन- रजा अकादमी चीफ
उन्होंने आगे कहा, “1988 में मुंबई में इस किताब को लेकर बवाल हुआ था तो 12 मुसलमानों की मौत हुई थी. इतने बड़े मामले को बहुत हल्के में लिया जा रहा है. साल 1988 में इस किताब और इसके लेखक सलमान रुश्दी के खिलाफ फतवा दिया. इसके बाद 14 फरवरी 1989 को भी एक फतवा आया था, जिस दिन मुंबई में 12 मुसलमानों की मौत हुई थी. इतने संवेदनशील मामले में कोर्ट ने बहुत आसानी से इजाजत दे दी.

सईद नूरी ने कहा कि कोर्ट ने मुसलमानों के जले पर नमक छिड़कने का काम किया है, जबकि कोर्ट को इस पर बैन बरकरार रखना चाहिए था. सरकार से हमारी गाजारिश है कि इस पर फिर से पाबंदी लगाई जाए.”
‘AIMIM’ नेता ने क्या कहा?
‘AIMIM’ नेता वारिस पठान ने ‘द सैटेनिक वर्सेज’ पर दिल्ली हाईकोर्ट के रुख पर कहा, “इस किताब को आए करीब चार दशक हो गए. जब किताब आई थी, तब भी इसका विरोध हुआ था. इसमें कई वाहियात चीजें लिखी हैं, जिसको हम बयां नहीं कर सकते. इस किताब को लेकर काफी प्रोटेस्ट हुआ था, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इस किताब से बैन हटा दिया है. मेरी सरकार से गुजारिश है कि वह इसमें हस्तक्षेप करे और दोबारा बैन लगाने की मांग करे.”
गंगा-जमुनी तहजीब करने की हो रही है कोशिश- वारिस पठान 
उन्होंने कहा, “फिर से लोगों को भड़काने का काम हो रहा है. वे किस दिशा में देश को ले जाना चाहते हैं. हमारा मानना है कि देश में प्यार, मोहब्बत और भाईचारा बना रहे. हमारी मांगी है कि गंगा-जमुनी तहजीब और हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए ऐसी किताब, जो एक समुदाय की भावना को ठेस पहुंचाती है, उस पर लगातार बैन लगे रहना चाहिए.”
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