Kanwar Yatra: सावन के पावन माह और कांवड़ यात्रा के बीच मुजफ्फरनगर में सोमवार को महिला कांवड़िया की गोद में किलकारी गूंजी। नीलकंठ से कांवड़ लेकर आ रही दिल्ली के भलस्वा निवासी नेहा ने जिला महिला अस्पताल में जुड़वा बेटों को जन्म दिया। सात माह में डिलिवरी के कारण दोनों बच्चों को अस्पताल स्टाफ ने एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती कर परिजनों को सूचना दी। एसएसपी संजय वर्मा ने अस्पताल पहुंचकर महिला और बच्चों का हाल जाना। इससे जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
दिल्ली के भलस्वा निवासी 20 वर्षीय नेहा अपनी साथी महिला कांवड़ियों के साथ शनिवार को कांवड़ लेने ऋषिकेश से आगे नीलकंठ पहुंची थी, वहां से कांवड़ उठा कर सभी सोमवार को मुजफ्फरगनर की सीमा में पहुंच गए। मुजफ्फरनगर पहुंचने पर सात महीने की गर्भवती नेहा को प्रसव पीड़ा हुई, इस दौरान उनके साथ वाले लोग आगे निकल गए। नेहा का दर्द देखकर अन्य कांवड़ियों ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस जीप से ही उसे लेकर जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया और अपनी कांवड़ लेकर आगे की ओर बढ़ गए। जिला महिला अस्पताल में चिकित्सकों ने डिलीवरी की स्थिति देख पुलिस को सूचना देकर डिलीवरी प्रक्रिया पूर्ण की। यहां सामान्य डिलीवरी से महिला ने दो जुड़वा बेटों को जन्म दिया। महिला से चिकित्सकों ने उसके पति अनुराग का नंबर लेकर उन्हें भी जुड़वा बेटे होने की सूचना और बधाई दी।
अस्पताल में अकेली महिला कांवड़िया के बेटे होने की जानकारी पर एसएसपी संजय वर्मा भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने महिला से वार्ता के बाद अस्पताल प्रशासन को जच्चा और बच्चा दोनों की उचित देखभाल के निर्देश दिए। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. मुरली भास्कर ने बताया कि महिला की सामान्य डिलीवरी के बाद दो जुड़वा बेटे हुए हैं, जिन्हें एसएनसीयू में भर्ती किया गया है। दोनों की हालत ठीक है, महिला भी स्वस्थ है। परिजनों को सूचना दे दी गई है, रात तक उनके मुजफ्फरनगर पहुंचने की जानकारी मिली है।
नीलकंठ से करीब 130 किलोमीटर से अधिक पैदल चलकर सोमवार को मुजफ्फरनगर पहुंची नेहा की हिम्मत देख अस्पताल का स्टाफ भी दंग रह गया। नेहा ने बताया कि वह घर से अकेले ही कांवड़ लाने के लिए पड़ोस की कुछ महिलाओं के साथ निकल आई थी। नेहा ने कहा कि सात माह ही हुए थे इसलिए अंदाजा ही नहीं था कि रास्ते में प्रसव पीड़ा भी हो जाएगी, लेकिन भोले बाबा के आशीर्वाद से स्वस्थ्य डिलीवरी हुई। यह मेरे लिए भोले बाबा का आशीर्वाद है। नेहा की हिम्मत देख कर हर कोई हैरान है।
जिला अस्पताल में नेहा और बच्चों को देखने पहुंचे एसएसपी संजय वर्मा ने सावन के पहले सोमवार को नेहा की जिंदगी में दो बेटों के एक साथ आने पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने बच्चों के लिए उपहार और नेहा को फल भेंट किए। एसएसपी ने नेहा से सहमति लेते हुए दोनों बेटों का नाम कार्तिकेय और गणेश रखने का सुझाव देते हुए नामकरण किया। इस दौरान अस्पताल स्टॉफ और पुलिसकर्मियों ने नेहा को बधाई भी दी।
महिला कांवड़िये के जुड़वा बच्चे होने की सूचना पर सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया भी उनका हालचाल जानने महिला चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने महिला को पुष्पगुच्छ भेंट कर उसके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की शुभकामनाएं दीं और चिकित्सकों से उपचार की जानकारी ली। सीएमओ का कहना है कि जच्चा एवं दोनों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। उन्होंने जच्चा एवं दोनों नवजातों के उपचार की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर चिकित्सकीय टीम को आवश्यक निर्देश दिए। सीएमओ ने बताया कि तीनों को सभी आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का पूरा प्रयास है कि जच्चा एवं दोनों नवजात पूर्णतः स्वस्थ होकर शीघ्र अपने परिजनों के साथ घर लौटें। अस्पताल स्टाफ द्वारा महिला के परिजनों को सूचना दे दी गई है। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. मुरली भास्कर भी मौजूद रहीं।
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दिनेश राठौर वर्तमान में ‘लाइव हिन्दुस्तान’ में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।
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