तमिलनाडु विधानसभा में मीसा कानून पर सीएम विजय के बयान के बाद पूर्व सीएम एमके स्टालिन ने पलटवार किया है। …और पढ़ें
एमके स्टालिन का सीएम विजय पर पलटवार।
सीएम विजय के मीसा बयान पर स्टालिन का पलटवार।
स्टालिन ने कहा, आपातकाल का इतिहास बदला नहीं जा सकता।
सरकार को फिल्म शूटिंग जैसा चलाने का आरोप लगाया।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों सियासी गर्माहट तेज है। वजह है कि बीते दिनों विधानसभा में इमरजेंसी के दौर के कानून ‘मीसा’ को लेकर हुई बयानबाजी और मुख्यमंत्री विजय का डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन की ओर इशारा करना, जिसके चलते राज्य में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी सातवें आसमान पर है।
ऐसे में अब तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीएम विजय पर जोरदार पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विजय को विधानसभा में बिना मतलब के विवादों पर बात नहीं करनी चाहिए।
बता दें कि इस मामले की शुरुआत तब हुई, जब सोमवार को विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने ‘मीसा’ का जिक्र करते हुए एक इशारा किया था, जिसमें उन्होंने अपना हाथ अपने जबड़े के पास रखा था।
राजनीतिक गलियारों में इस इशारे को सीधे तौर पर 1976 में आपातकाल के दौरान स्टालिन की हिरासत और कथित जबड़े की चोट से जोड़कर देखा गया। हालांकि, दो दिन पहले ही विजय ने सफाई दी थी कि उनका वह हाथ का इशारा किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं किया गया था।
विजय को ‘थम्बी विजय’ यानी भाई विजय कहकर संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा कि उनका आपातकाल के दौरान किया गया संघर्ष डीएमके के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा है। स्टालिन ने साफ शब्दों में कहा कि इतिहास को कभी बदला नहीं जा सकता।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए वीडियो में स्टालिन ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो उनके इस संघर्ष पर सवाल उठाते हैं और कहा कि वे चाहें तो विधानसभा की लाइब्रेरी में रखे दस्तावेजों को खुद जाकर देख सकते हैं।
जारी वीडियो में विजय पर सीधा हमला बोलते हुए स्टालिन ने कहा कि आपने तो विधानसभा को ही रील्स बनाने की जगह बना दी है। हमारे बनाए पुल पर खड़े होकर फोटोशूट करवाते हैं और सरकार को ऐसे चला रहे हैं जैसे कोई फिल्म की शूटिंग चल रही हो।
पूर्व सीएम ने कहा कि अपनी नाकाम और ढीली-ढाली प्रशासनिक व्यवस्था को छिपाने के लिए आप इस तरह की रील्स पोस्ट कर रहे हैं और पूरी एक पीढ़ी को धोखा दे रहे हैं।
अपने संघर्ष को याद करते हुए स्टालिन ने 1976 के उस दौर को ताजा किया जब देश में आपातकाल लगा था। उन्होंने बताया कि डीएमके ने इमरजेंसी और मीसा के विरोध में मरीना बीच पर एक बहुत बड़ी रैली की थी।
स्टालिन ने बताया कि कैसे 31 जनवरी 1976 को केंद्र सरकार ने डीएमके की सरकार को बर्खास्त कर दिया था। सरकार गिरते ही पुलिस गोपालपुरम स्थित एम. करुणानिधि के घर स्टालिन को गिरफ्तार करने पहुंच गई थी, लेकिन उस समय स्टालिन चुनाव प्रचार के सिलसिले में बाहर थे।
स्टालिन ने आगे बताया कि जब वे वापस लौटे, तो उनके पिता करुणानिधि ने खुद पुलिस को फोन किया और उन्हें गिरफ्तार करवाने के लिए कहा। इसके बाद उन्हें मीसा कानून के तहत जेल में डाल दिया गया।
जेल के भीतर सह प्रताड़नाओं को याद करते हुए स्टालिन वीडियो में भावुक और आक्रामक दोनों नजर आए। इस दौरान उन्होंने जबड़े को लेकर भी अपना रुख साफ किया। उन्होंने बताया कि कैसे आपातकाल के दौरान कैदियों को बेहद गंदे और अस्वच्छ कमरे में रखा जाता था और पुलिस तथा अन्य लोगों द्वारा उन्हें लगातार पीटा जाता था।
स्टालिन ने कहा कि इसी बेरहमी के दौरान उनके जबड़े की हड्डी टूट गई थी, जिसके निशान और दर्द आज भी उनके पास हैं। डीएमके प्रमुख ने विजय पर तंज कसते हुए कहा कि आपने भी तो विधानसभा में वैसे ही हाथ रखकर दिखाया था ना? वह बिल्कुल सही है। आज भी मुझे उन पलों की मार के निशान और जख्म याद हैं।
इसके साथ ही अंत में पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने डीएमके नेता और पूर्व मद्रास मेयर चित्तू बाबू की मौत का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जेल में हुई भारी मारपीट के कारण ही उनके साथी चित्तू बाबू की मौत हो गई थी, और वे धक्के भी स्टालिन के हिस्से के थे जिन्हें चित्तू बाबू ने खुद पर झेला था।