सिर्फ एक हड्डी से मिला 14.3 करोड़ साल पुराने विशाल डायनासोर का सुराग, वैज्ञानिक भी हुए हैरान – India.Com

Dinosaur News: धरती के नीचे दबी एक छोटी-सी हड्डी ने ऐसा राज उजागर किया है, जिसने करोड़ों साल पुराने डायनासोरों के इतिहास को फिर से चर्चा में ला दिया है. हैरानी की बात यह है कि वैज्ञानिकों ने सिर्फ एक हड्डी के सहारे एक ऐसे विशालकाय डायनासोर की पहचान कर ली, जो करीब 14.3 करोड़ साल पहले धरती पर घूमता था. वैज्ञानिकों ने थाईलैंड के उत्तर-पूर्वी हिस्से में यह खोज की है. इस विशालकाय लंबी गर्दन वाले डायनासोर का नाम ‘उरागासॉरस कलासिनेन्सिस’ रखा गया है. यह खोज Scientific Reports जर्नल में प्रकाशित शोध पर आधारित है. खास बात यह है कि यह थाईलैंड में औपचारिक रूप से नामित मैमेनचिसॉरिड परिवार का पहला डायनासोर है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज एशिया में विशालकाय लंबी गर्दन वाले डायनासोरों के विकास और उनके फैलाव को समझने में बड़ी भूमिका निभाएगी.

जिस हड्डी के आधार पर यह खोज हुई, वह थाईलैंड के फू क्रादुंग फॉर्मेशन से मिली थी. आस-पास कुछ और हड्डियां भी मिली थीं, लेकिन वैज्ञानिक यह पक्का नहीं कर सके कि वे उसी डायनासोर की हैं. इसलिए नई प्रजाति का विवरण सिर्फ इसी एक कशेरुका के आधार पर तैयार किया गया. इस हड्डी में कुछ ऐसे खास शारीरिक लक्षण मिले, जो अब तक किसी दूसरे डायनासोर में नहीं देखे गए थे. इसकी बनावट में Y आकार की विशेष संरचना, लंबी आंसू जैसी हवा से भरी गुहाएं और अन्य अनोखी विशेषताएं थीं.

dinosaur news

इन्हीं गुणों की तुलना दुनिया भर में मिले सैकड़ों सॉरोपोड डायनासोरों के जीवाश्मों से की गई और यह तय किया गया कि यह पूरी तरह नई प्रजाति है. इस खोज से यह भी साबित होता है कि आधुनिक जीवाश्म विज्ञान में केवल हड्डियों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी संरचना और गुणवत्ता ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. कई बार एक अच्छी तरह सुरक्षित हड्डी भी वैज्ञानिकों को उतनी ही जानकारी दे सकती है, जितनी कई अधूरे कंकाल नहीं दे पाते.
शोधकर्ताओं ने उरागासॉरस को मैमेनचिसॉरिड परिवार का सदस्य बताया है. यह वही समूह है, जिसके डायनासोर अपनी बेहद लंबी गर्दन के लिए जाने जाते थे. इस परिवार के कई डायनासोरों की लंबाई 25 मीटर से भी अधिक मानी जाती है और वे धरती पर रहने वाले सबसे बड़े शाकाहारी जीवों में शामिल थे. हालांकि उरागासॉरस का पूरा आकार अभी तय नहीं किया जा सकता, क्योंकि उसके शरीर का सिर्फ एक मुख्य जीवाश्म मिला है. फिर भी उसकी हड्डी की बनावट साफ तौर पर बताती है कि वह इसी विशाल परिवार का हिस्सा था.

इस खोज से यह भी संकेत मिलता है कि लेट जुरासिक काल में एशिया, खासकर आज का थाईलैंड और चीन वाला इलाका, इन विशाल डायनासोरों के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा. इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में भी मदद मिलेगी कि उस समय अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले डायनासोरों के बीच किस तरह का विकास और संबंध था.
जिस फू क्रादुंग फॉर्मेशन से यह जीवाश्म मिला है, वह पहले भी कई महत्वपूर्ण खोजों के लिए जाना जाता रहा है. करीब 15 करोड़ साल पहले यहां नदियां, बाढ़ वाले मैदान और घने जंगल हुआ करते थे, जहां विशाल शाकाहारी डायनासोरों के साथ-साथ शिकारी डायनासोर, मगरमच्छों के पूर्वज, कछुए, शार्क, लंगफिश और शुरुआती स्तनधारी जीव भी रहते थे. वैज्ञानिकों का मानना है कि उरागासॉरस भी इसी समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा था.
यह खोज इस बात का भी प्रमाण है कि दक्षिण-पूर्व एशिया में अभी कई ऐसे जीवाश्म छिपे हो सकते हैं, जो भविष्य में डायनासोरों के इतिहास की नई कहानी सामने ला सकते हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि आज की आधुनिक तकनीक, बेहतर इमेजिंग और विस्तृत शारीरिक विश्लेषण की मदद से अब छोटे-से-छोटे जीवाश्म से भी करोड़ों साल पुराने जीवों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकती है. उरागासॉरस की खोज इसी वैज्ञानिक प्रगति का बेहतरीन उदाहरण है, जिसने सिर्फ एक हड्डी के सहारे प्रागैतिहासिक दुनिया की समझ को और गहरा कर दिया.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Viral की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
नंदन सिंह ने पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2015 में ईनाडु डिजिटल यानी ईटीवी (हैदराबाद) से की. यहां इन्होंने बतौर कॉपी राइटर करीब 10 महीनों तक काम किया. सीखने … और पढ़ें
Subscribe to Our Newsletter Today!
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
© 1998-2026 INDIADOTCOM DIGITAL PRIVATE LIMITED, ALL RIGHTS RESERVED

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News