सूर्यकुमार यादव से बेहतर बल्लेबाज तो खोज लाएंगे, पर वैसा कप्तान कहां मिलेगा? आंकड़े दे रहे गवाही – AajTak

भारतीय क्रिकेट में एक बड़े बदलाव की आहट कुछ दिनों से सुनाई दे रही थी. वो बदलाव 4 जून (गुरुवार) को हो भी गया. सूर्यकुमार यादव की टी20 कप्तानी छिन गई और उनकी जगह श्रेयस अय्यर क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में भारतीय टीम के नए कप्तान बने. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि 2008 में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप और ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए भारतीय टीम की कमान किसे सौंपी जाए. अब उसने इस बाबत बड़ा फैसला ले ही लिया.
सूर्यकुमार यादव ने टी20 कप्तान के तौर पर शानदार सफलता हासिल की. उनके नेतृत्व में भारत ने टी20 क्रिकेट में यादगार जीतें दर्ज कीं. सूर्यकुमार ने 52 टी20 इंटरनेशनल मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी की, जिसमें टीम ने 40 मुकाबलों में जीत हासिल की. 8 मुकाबले भारतीय टीम ने हारे. जबकि दो मुकाबले टाई रहे और दो का नतीजा नहीं निकला. सूर्या की कप्तानी में भारतीय टीम एक भी सीरीज नहीं हारी. सूर्या के अंडर ही भारत ने एशिया कप 2025 और इस साल टी20 वर्ल्ड कप अपने नाम किया. यानी बतौर कप्तान सूर्या का प्रदर्शन बेमिसाल रहा.
सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में जीत का प्रतिशत 76.96 रहा. देखा जाए तो भारतीय टीम के लिए 5 या उससे ज्यादा टी20I मैचों में कप्तानी करने वाले धुरंधरों में रोहित शर्मा का ही जीत प्रतिशत (79.03) सूर्या से ज्यादा रहा. रोहित की कप्तानी में भारतीय टीम ने टी20 क्रिकेट में 49 मुकाबले जीते. जबकि 12 मैचों में टीम को हार मिली और एक मुकाबला टाई पर छूटा. विराट कोहली तो जीत के मामले में सूर्या और रोहित से काफी पीछे रहे. कोहली की कप्तानी में भारत का टी20 क्रिकेट में जीत प्रतिशत 60.00 रहा.
बल्लेबाजी फॉर्म सूर्या को ले डूबी!
भारतीय क्रिकेट में सिर्फ कप्तानी के आंकड़े काफी नहीं होते. टीम इंडिया की परंपरा रही है कि कप्तान अपनी जगह प्लेइंग इलेवन में एक खिलाड़ी के रूप में भी पूरी तरह डिजर्व करे. यहीं पर सूर्यकुमार यादव मुश्किल में दिखाई दिए. असल चिंता उनकी कप्तानी नहीं, बल्कि बल्लेबाजी फॉर्म रही. पिछले कुछ समय से टी20 क्रिकेट में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है. ऐसे में पहले से ही सवाल उठने लगे थे कि क्या 35 वर्षीय सूर्यकुमार टी20 वर्ल्ड कप और ओलंपिक के लिए भारतीय टीम की योजनाओं में फिट बैठते हैं?
कप्तानी की रेस में पाटीदार भी थे
इसी वजह से नए कप्तान और नंबर-4 बल्लेबाज की तलाश बीसीसीआई को करनी पड़ी. इस रेस में श्रेयस अय्यर के अलावा रजत पाटीदार थे. श्रेयस का कप्तानी रिकॉर्ड शानदार रहा है. वह आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) इतिहास के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजी टीम्स को फाइनल तक पहुंचाया. उन्होंने 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को चैम्पियन बनाया और 2025 में पंजाब किंग्स (PBKS) को फाइनल तक पहुंचाया. इससे पहले उन्होंने 2020 के सीजन में दिल्ली कैपिटल्स (DC) के साथ फाइनल तक का सफर तय किया था. श्रेयस के पास 51 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों का अनुभव भी है.
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वहीं दूसरी ओर रजत पाटीदार ने पिछले दो साल में अपनी कप्तानी से सबको प्रभावित किया था. उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को लगातार दो आईपीएल खिताब जिताकर इतिहास रच दिया. अगर सिर्फ फॉर्म की बात करें तो पाटीदार का पलड़ा भारी नजर आता था, लेकिन बीसीसीआई ने श्रेयस अय्यर को तवज्जो दिया. खासकर 2024 और 2026 के सीजन में तो रजत पाटीदार का प्रदर्शन असाधारण रहा.
कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चयनकर्ता भविष्य को ध्यान में रखकर फैसला लेते तो रजत पाटीदार को सीधे टी20 टीम की कप्तानी सौंपी जाती. ऐसा होने पर वह साल 1936 के बाद किसी भी प्रारूप में डेब्यू मैच में भारत की कप्तानी करने वाले पहले खिलाड़ी बन जाते.
बोर्ड ने नहीं लिया सरप्राइज कॉल
हालांकि कप्तानी की दौड़ सिर्फ इन दो खिलाड़ियों तक सीमित नहीं थी. हार्दिक पंड्या पहले भी भारत की कप्तानी कर चुके हैं, लेकिन उनकी फिटनेस सबसे बड़ी चिंता रही. संजू समसन भी एक मजबूत विकल्प माने जा रहे थे. टी20 वर्ल्ड कप 2026 के अहम मुकाबलों में उनके शानदार प्रदर्शन ने उनकी दावेदारी को मजबूत किया था.
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इसके अलावा 23 वर्षीय तिलक वर्मा को भविष्य का कप्तान माना जा रहा है. उन्हें श्रीलंका टूर पर भारत-ए की कप्तानी करनी है और चयनकर्ता उन्हें लंबी अवधि के विकल्प के तौर पर देख सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा उप-कप्तान अक्षर पटेल का नाम भी चर्चा में था. ऑलराउंडर होने के कारण वह टीम संतुलन के लिहाज से एक मजबूत विकल्प साबित हो सकते थे.
फिलहाल इतना तय है कि भारतीय क्रिकेट एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. अब टीम इंडिया को सिर्फ नया कप्तान ही नहीं, बल्कि नया टी20 चेहरा भी मिला है. अब सभी की नजरें शनिवार को होने जा रहे टीम सेलेक्शन पर टिकी हैं क्योंकि यह सिर्फ अगले दौरे के लिए नहीं, बल्कि 2028 के टी20 वर्ल्ड कप और ओलंपिक में भारत की दिशा तय कर सकता है.

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