'सोनिया गांधी की NAC दिमागी नक्सल का क्लासिक उदाहरण', कांग्रेस पर RSS का वार – Aaj Tak News

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए भाषण में इस्तेमाल शब्द ‘दिमागी नक्सल’ को लेकर सियासत जारी है. RSS  पत्रिका ‘ऑर्गेनाइजर’ के ताजा संपादकीय में कांग्रेस और पूर्ववर्ती UPA सरकार पर हमला बोला गया है. 
इस संपादकीय का शीर्षक ‘डिकोडिंग एंड डिफीटिंग द दिमागी नक्सल्स’ है. इसमें आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी की अगुवाई वाली नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) ‘दिमागी नक्सलियों’ के शासन पर कब्जा करने का एक क्लासिक उदाहरण थी.
इस लेख में लिखा है कि ये लोग शहरों में गुप्त रूप से काम करते हैं. वो छात्रों, महिलाओं, मजदूरों, किसानों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यकों के नाम पर कई तरह के फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन बनाते हैं.
संपादकीय में लिखा है, ‘ये लोग बंदूक नहीं उठाते. इसके बजाय वो प्रख्यात इतिहासकार, बुद्धिजीवी, पुरस्कार विजेता साहित्यकार, कानूनविद, मानवाधिकार कार्यकर्ता, स्वतंत्र पत्रकार, नामचीन कलाकार या पर्यावरणविद जैसे मुखौटों का इस्तेमाल करते हैं. सिविल सोसाइटी संवैधानिक लोकतंत्र के खिलाफ उनका एक हथियार है.’
अंतिम पड़ाव पर है विचारधारा का असर
संपादकीय में कहा गया कि नौकरशाही, नीति निर्माण, न्यायपालिका, शिक्षा क्षेत्र, मीडिया और NGO में घुसपैठ करना इनकी क्रांतिकारी रणनीति का हिस्सा रहा है. जहां इनके अपने मंच नहीं होते, वहां ये दूसरे संगठनों में घुसकर बेहद सीक्रेट तरीके से अपना एजेंडा तय करते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए लेख में कहा गया है कि देश ने जंगलों से बंदूकधारी नक्सलवाद को खत्म करने में सफलता पाई है. लेकिन इसके वैचारिक समर्थक अब नीतियों में हेरफेर करके हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने का मौका तलाश रहे हैं.
चिदंबरम के तंज पर करारा पलटवार
प्रधानमंत्री के बयान के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा था कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है. इस पर तंज कसते हुए RSS की मैगजीन के लेख में कहा गया है कि पीएम मोदी के इस शब्द को इस्तेमाल करते ही कुछ लोग बौखला गए और इसे अपने लिए एक तमगा मानने लगे.
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लेख में आगे लिखा है कि आम लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर उन्हें बेवकूफ बनाने वाले इन ‘दिमागी नक्सलियों’ को पहचानना, बेनकाब करना और सुरक्षा बलों का सहयोग करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है.
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