हंसवर गांव में 16 अक्टूबर शुक्रवार रात रामलीला के पांचवें दिन भगवान राम के वनगमन और राजा दशरथ के प्राण त्यागने का प्रसंग देख दर्शक भावुक हो गए। कलाकारों ने मंथरा-कैकयी संवाद, कैकयी के कोप भवन में जाने और दो वरदान मांगने का अच्छे से मंचन किया। मंथरा क
रामलीला में दिखाया गया कि मंथरा के बहकावे में आकर कैकयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगे। पहले में भरत का राज्याभिषेक और दूसरे में भगवान राम के लिए 14 साल का वनवास मांगा। रघुकुल की मर्यादा और पिता के वचन का मान रखने के लिए भगवान राम खुशी-खुशी वन जाने को तैयार हो गए।
वनगमन के दौरान भगवान राम की श्रृंगवेरपुर में निषादराज गुह से मुलाकात हुई। इसके बाद राम ने सुमंत को अयोध्या वापस भेज दिया। अयोध्या पहुंचकर सुमंत ने राजा दशरथ को राम के वनगमन की पूरी बात बताई। पुत्र वियोग में परेशान दशरथ को श्रवण कुमार के माता-पिता का श्राप याद आ गया।
राम-राम कहते हुए राजा दशरथ ने अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद तीनों रानियों के विलाप का दृश्य दिखाया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय और भावपूर्ण संवादों से रामकथा के ये प्रसंग जीवंत हो उठे। राम के वनवास और दशरथ के निधन के दृश्यों के दौरान रामलीला परिसर में माहौल भावुक हो गया।
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