शहर की लाल मस्जिद में जमीयत अहले सुन्नत के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय ज़िक्र-ए-शहीदान-ए-कर्बला के छठे दिन शनिवार की रात अमीरुल मोमिनीन हज़रत मौला अली की शान, अज़मत और सीरत-ए-मुबारका के विभिन्न पहलुओं पर मुफ़्ती मोहम्मद दानिश क़ादरी ने बयान किया। मुफ़्ती मोहम्मद दानिश क़ादरी ने कहा कि हज़रत मौला अली की महानता को केवल उनकी वीरता या अहले बैत से संबंध तक सीमित नहीं किया जा सकता। वे ज्ञान, न्याय, त्याग, इबादत और मानव सेवा की ऐसी समग्र व्यक्तित्व के धनी थे। जिनकी ज़िंदगी का प्रत्येक पहलू आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शन का स्रोत है। उन्होंने कहा कि रसूल-ए-अकरम हज़रत मोहम्मद की विशेष परवरिश और निकटता ने हज़रत मौला अली के व्यक्तित्व को ऐसा बनाया कि उनका नाम आते ही ज्ञान, निर्भीकता, न्यायप्रियता और सत्यनिष्ठा की छवि सामने आ जाती है।
उन्होंने कहा कि हिजरत की रात अपने प्राणों की परवाह किए बिना रसूल-ए-अकरम के बिस्तर पर सो जाना वफ़ादारी, समर्पण और त्याग का ऐसा उदाहरण है, जिसकी मिसाल इतिहास में बहुत कम मिलती है। इसी प्रकार ग़ज़वा-ए-ख़ैबर में जब मुसलमान कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे थे, तब हज़रत अली ने असाधारण साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए विजय का मार्ग प्रशस्त किया। अंत में देश की तरक्की, अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और समस्त मानवता की भलाई के लिए विशेष दुआ की गई।
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