संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत को पाकिस्तान और चीन के साथ अपने मौजूदा संबंधों को तोड़ना नहीं चाहिए, बल्कि संघर्ष के दौरान सरकार और सेना का साथ द …और पढ़ें
संघ प्रमुख मोहन भागवत।
भारत को पाकिस्तान और चीन से मौजूदा संबंध नहीं तोड़ने चाहिए।
संघर्ष के समय सरकार और सेना का साथ देना चाहिए।
स्थायी शत्रुता और घृणा किसी समस्या का समाधान नहीं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को युवा पीढ़ी Gen-Z के आंदोलन और फिर भारत और पाकिस्तान के साथ भारत के संबंध पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन के साथ पहले से मौजूद संबंधों को नहीं तोड़ना चाहिए।
हालांकि अपने बयान पर उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संघर्ष के समय, या कहें तो आतंकवाद की घटनाओं के दौरान, हमें सरकार और सेना के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थायी शत्रुता और स्थायी घृणा कोई समाधान नहीं है।
भागवत ने कहा कि भारत और चीन के संबंध कई सदियों पुराने हैं। जहां तक पाकिस्तान का सवाल है, वह भारत का हिस्सा था। उनके अनुसार, सदियों पुराने संबंधों को भुलाया नहीं जाना चाहिए। ये संबंध तोड़े नहीं जा सकते, इन्हें संघर्ष की स्थिति तक स्थगित किया जा सकता है। लेकिन भारत का समाधान क्या है?
भागवत ने आगे जोर दिया कि भारत का उद्देश्य दूसरों पर विजय प्राप्त करना या उन्हें नष्ट करना नहीं है, बल्कि एक सामंजस्यपूर्ण, आत्मसात करने वाली प्रक्रिया का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि संवाद होना चाहिए। संघर्ष इन सभी संबंधों को रोक सकते हैं, लेकिन वे इन्हें तोड़ नहीं सकते और न ही उन्हें तोड़ना चाहिए।
इसी दौरान देश में नीट समेत कई और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक पर उद्वेलित हो रहे युवाओं के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आज जेन-जी और जेन-अल्फा से न केवल संवाद साधा, बल्कि खुलकर उनके सारे सवालों के जवाब भी दिए।
उन्होंने न सिर्फ जेन-जी पर आंख मूंदकर भरोसा जताया, बल्कि बेरोजगारी, आरक्षण और एलजीबीटीक्यू जैसे मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अगर जेन-जी किसी मुद्दे पर विरोध कर रहा है, तो वह देशविरोधी नहीं हो जाता।