हरियाणा-यूपी सीमा पर भूमि विवाद के बाद भारी पुलिस बल तैनात, सर्वे ऑफ इंडिया की देखरेख में सीमांकन शुरू – karnalbreakingnews.com

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हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित यमुना क्षेत्र में भूमि के कब्जे और सटीक सीमांकन को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इस विवाद के चलते सीमावर्ती इलाके में दोनों राज्यों का भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमला तैनात किया गया है। मामला मुख्य रूप से जमीन के मालिकाना हक और राज्यों की भौगोलिक सीमा के निर्धारण से जुड़ा है, जिसे लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस विवाद को स्थायी रूप से सुलझाने के लिए ‘सर्वे ऑफ इंडिया’ द्वारा दिए गए निर्देशांकों (कोऑर्डिनेट्स) का सहारा लिया जा रहा है। सरकार की योजना के मुताबिक, इन चिन्हित स्थानों पर पिलर लगाए जाएंगे ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के अतिक्रमण या गलत कब्जे की गुंजाइश न रहे। इस प्रक्रिया के दौरान पीडब्ल्यूडी विभाग को पिलर लगाने का कार्य सौंपा गया है और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बकायदा ड्यूटी मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति की गई है।
इस विवाद के पीछे एक बड़ा कारण खनिज राजस्व भी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा सरकार द्वारा लागू नियमों के अनुसार, यदि कोई भी खनिज हरियाणा से उत्तर प्रदेश में ले जाया जाता है, तो उसके लिए आई.एस.टी.पी. (ISTP) का भुगतान करना अनिवार्य होगा। राजस्व की इस सुरक्षा के लिए सीमाओं का स्पष्ट होना अत्यंत आवश्यक है, यही कारण है कि सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा की गई डिमार्केशन (निशानदेही) को ही अंतिम आधार माना जा रहा है।
मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों और कुछ निजी व्यक्तियों के बीच तीखी बहस की खबरें भी सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लगाए गए हैं कि कुछ बाहरी या अज्ञात लोग क्षेत्र में अशांति फैलाने और जबरन कब्जे का प्रयास कर रहे हैं। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस बल मुस्तैद है और सीमावर्ती उत्तर प्रदेश के शामली जिले के अधिकारियों के साथ भी समन्वय बिठाने का प्रयास किया जा रहा है।
वर्तमान में सीमांकन का कार्य जारी है। प्रशासन का कहना है कि वे केवल केंद्र सरकार की एजेंसी द्वारा निर्धारित सीमाओं का पालन कर रहे हैं। हालांकि, स्थानीय विरोध और उत्तर प्रदेश पुलिस की मौजूदगी के बीच यह कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों राज्यों के अधिकारी आपसी सहमति और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर इस दशकों पुराने सीमा विवाद को किस प्रकार अंतिम रूप देते हैं। फिलहाल, क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्त बढ़ा दी गई है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
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