मोतिहारी,निप्र। महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के राजभाषा प्रकोष्ठ एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी माह के अंतर्गत संघ की राजभाषा नीति पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अंगवस्त्र, पौधा और प्रतीक चिह्न से अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो संजय श्रीवास्तव ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि हिंदी राजभाषा के रूप में निरंतर प्रगति कर रही है। कार्यक्रम की शुरुआत में हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. श्याम नंदन ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि राजभाषा हिंदी पर जब भी बात हो भारत के संघीय ढांचे को देख कर हो। हिंदी सिर्फ अठारह बोलियों का समूह मात्र नहीं है बल्कि वह देश की आम जनता के संपर्क की भाषा है।
मीडिया अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सुनील दीपक घोडके ने कहा कि जल्दबाजी में लिखा गया साहित्य, साहित्य नहीं बल्कि समाचार होता है। और इसी क्रम में उन्होंने कहा कि हिंदी की पहली पत्रिका उदंत मार्तंड से लेकर वर्तमान तक हिंदी निरंतर प्रगति करती कर रही है।
डॉ. दीपक, सहायक आचार्य, अंग्रेज़ी विभाग ने कहा कि कोई भी भाषा उसके साहित्यकारों से, बोलने वालों तथा लिखने वालों से ही समृद्ध होती है इसीलिए भाषा को बचाने का काम हमारा है। संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. बबलू पाल ने एक विद्वान के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदी के विकास में 12 प्र. – प्रेरणा, प्रोत्साहन, प्रेम, पुरस्कार, प्रशिक्षण, प्रयोग, प्रचार, प्रयास, प्रबंधन, प्रमोशन आदि आवश्यक है।
इसी क्रम में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. बिमलेश कुमार सिंह ने कहा कि अंग्रेजी के विद्वानों ने भी हिंदी के विकास में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी के साथ उन्होंने मुनव्वर राणा, फिराक गोरखपुरी का भी जिक्र किया तथा कालिदास, शेक्सपीयर, हरिवंश राय बच्चन और भारतेंदु हरिश्चंद्र आदि का जिक्र भी किया। प्रो. शिरीष मिश्रा, पूर्व अध्यक्ष वाणिज्य विभाग ने अपने वक्तव्य में कहा कि अपने छात्र जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए वाणिज्य को हिंदी में पढ़ने-पढ़ाने की बात कही। अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. राजेंद्र सिंह बडगूजर, अध्यक्ष राजभाषा प्रकोष्ठ एवं हिंदी विभाग ने कहा कि हिंदी को लेकर कोई चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। विमर्शों के माध्यम से हिंदी का निरंतर विकास हो रहा है। आवश्यकता है कि हम हिंदी को प्रशासन, तकनीक एवं विज्ञान को भाषा बनाएं।
अंत में डॉ. गोविन्द प्रसाद वर्मा, सहायक आचार्य हिंदी विभाग व हिंदी अधिकारी ने भाषा के विभिन्न पहलुओं पर बात करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। मंच का सफल संचालन हिंदी विभाग के शोधार्थी शिवम कुमार सिंह ने किया।
इस कार्यक्रम में अंग्रेजी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. उमेश पात्रा, डॉ. चंदोवा ब्लांडे नरसिंह, हिंदी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. आशा मीणा व अन्य तथा शोधार्थी, विद्यार्थी मौजूद थे
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