हिन्दी भाषा के वैश्विक विस्तार पर साहित्यकारों ने किया मंथन – Live Hindustan

रुद्रपुर, संवाददाता। उत्तराखंड भाषा संस्थान, देहरादून और बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को नगर निगम सभागार, रुद्रपुर में हिन्दी भाषा महोत्सव एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘वैश्वीकरण के युग में : हिन्दी भाषा और समाज’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में देशभर से पहुंचे साहित्यकारों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने हिन्दी के वर्तमान स्वरूप, डिजिटल युग में उसकी भूमिका और वैश्विक संभावनाओं पर विचार साझा किए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। प्रथम सत्र में उत्तराखंड भाषा संस्थान की उपनिदेशक जसविंदर कौर और बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति के संस्थापक एवं अध्यक्ष विवेक बादल बाजपुरी समेत अन्य अतिथियों ने हिन्दी भाषा के महत्व पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर उत्तराखंड के सांस्कृतिक मांगल गीत की प्रस्तुति भी दी गई। राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. शशांक शुक्ल ने वैश्वीकरण के दौर में हिन्दी की भूमिका, भारतीय भाषाओं के समन्वय और डिजिटल माध्यमों में हिन्दी की बढ़ती संभावनाओं पर व्याख्यान दिया। डॉ. हेमा जोशी ‘हिमाद्रि’ ने डिजिटल मीडिया और प्राकृतिक भाषा प्रौद्योगिकी के संदर्भ में हिन्दी के विकास पर प्रकाश डाला। प्रो. बीना मथेला ने हिन्दी के वैश्विक विस्तार पर अपने विचार व्यक्त किए, जबकि डॉ. शशि जोशी ने समकालीन साहित्य के विविध आयामों पर चर्चा की। संगोष्ठी में हिन्दी भाषा, साहित्य, पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया, लोकभाषाओं और वैश्विक हिन्दी साहित्य से जुड़े विषयों पर शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इस दौरान साहित्यकारों की कई पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। इनमें ‘चरित्रहीन’, ‘जीवंत हैं हम’, ‘समकालीन कथा साहित्य : कृष्णा सोबती’, ‘अल्फ़ाज़ रहने दो’, ‘तूफान की आहट’, ‘मृत्युलोक की सत्ता’, ‘राम भरोसे’, ‘प्रेयसी’, ‘कृत्रिम बुद्धि का उपयोग’, ‘आध्यात्मिक चेतना एवं प्रकृति के रंग’ तथा ‘छम-छम आया बसंत’ शामिल रहीं। द्वितीय सत्र में राष्ट्रीय काव्य गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। आयोजन के दौरान साहित्यकारों, लेखकों, कवियों, शोधार्थियों और सहयोगियों को सम्मानित भी किया गया। बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति के संस्थापक विवेक बादल बाजपुरी ने बताया कि संस्था हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वहीं, उत्तराखंड भाषा संस्थान प्रदेश में भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा दे रहा है।
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