हूतियों ने मदीना को भी नहीं छोड़ा! मस्जिद-ए-नबवी के पावर स्टेशन पर ड्रोन हमला, भड़के मुस्लिम देश – Bharat24live

Shreeom Singh
Date: 02-10-26 10:59
Houthi Medina Attack: यमन के हूती विद्रोहियों पर सऊदी अरब के मदीना में ड्रोन हमला करने का आरोप लगा है. बताया गया है कि हमले में उस तैबा पावर स्टेशन को निशाना बनाया गया, जो पैगंबर की मस्जिद यानी मस्जिद-ए-नबवी को बिजली सप्लाई करता है. सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस हमले की जानकारी दी है.
गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, ड्रोन हमला 29 सितंबर की सुबह करीब 5:11 बजे किया गया. उन्होंने कहा कि घटना की जांच और ड्रोन के मलबे की जांच के बाद इसके पीछे हूती मिलिशिया का हाथ होने की पुष्टि हुई है.
मलिकी ने बताया कि हमले में पावर स्टेशन का एक ट्रांसफॉर्मर खराब हुआ है. हालांकि, इससे बिजली सप्लाई के पूरे नेटवर्क पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा.
मस्जिद-ए-नबवी को बिजली देने वाली जगह को बनाया निशाना
सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता ने कहा कि मस्जिद-ए-नबवी को बिजली देने वाली सुविधा पर हमला गंभीर मामला है. उनके मुताबिक, हूतियों की ऐसी कोशिशों का मकसद मक्का और मदीना जैसे पवित्र शहरों को निशाना बनाना और दुनिया भर के मुसलमानों को भड़काना हो सकता है.
मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में शामिल है और यहां स्थित मस्जिद-ए-नबवी दुनिया भर के मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. यही वजह है कि पावर स्टेशन पर हुए हमले की खबर सामने आने के बाद कई मुस्लिम देशों ने इसकी निंदा की.
हमले से नाराज हुए खाड़ी देश
मदीना में पावर स्टेशन पर ड्रोन हमले की खाड़ी देशों ने भी आलोचना की है. गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के महासचिव जसीम अल-बुदैवी ने सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई.
उन्होंने कहा कि पैगंबर की मस्जिद को बिजली देने वाले स्टेशन को निशाना बनाना बेहद गंभीर कदम है. उनके मुताबिक, इस तरह का हमला तनाव बढ़ाने के साथ दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं को भड़का सकता है.
यानबू सऊदी अरब के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यानबू सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर लाल सागर के किनारे स्थित एक बड़ा औद्योगिक और तेल केंद्र है. यह सऊदी अरब के लिए तेल निर्यात के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है. यहां सऊदी अरामको का यानबू नॉर्थ टर्मिनल है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भेजा जाता है.
रिपोर्टों के मुताबिक, इस टर्मिनल से हर दिन करीब 15 लाख बैरल कच्चा तेल लोड करने की क्षमता है. यानबू की एक बड़ी रणनीतिक भूमिका भी है. सऊदी अरब के पूर्वी इलाकों से तेल को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए यानबू तक लाया जा सकता है और फिर लाल सागर के रास्ते दूसरे देशों तक भेजा जा सकता है.
इस वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव या समुद्री रास्तों में किसी तरह की परेशानी होने पर यानबू सऊदी अरब के लिए तेल भेजने का एक वैकल्पिक रास्ता बन जाता है.
UAE, बहरीन और कुवैत ने भी की निंदा
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए इसे सऊदी अरब की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरा बताया. बहरीन ने भी हमले की आलोचना की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन बताया.
कुवैत ने भी सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताते हुए हमले की निंदा की. उसने कहा कि नागरिक और जरूरी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना गंभीर मामला है.
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चिंता मदीना के धार्मिक महत्व को लेकर है. मस्जिद-ए-नबवी जैसी पवित्र जगह को बिजली देने वाली सुविधा पर हमले की खबर ने सऊदी अरब के साथ-साथ दूसरे मुस्लिम देशों में भी नाराजगी पैदा की है.
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