Shreeom Singh
Date: 03-10-26 09:03
Saudi-Pakistan: मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के बीच सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी शुरू कर दी है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर हूतियों का कब्जा खत्म करने के लिए आने वाले हफ्तों में कार्रवाई कर सकता है. इस अभियान में 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को जमीन पर उतारे जाने की योजना है, जबकि सऊदी अरब हवाई हमलों के जरिए उनका साथ दे सकता है.
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने सऊदी अरब में 30 से 40 हजार सैनिक तैनात किए हैं. हालांकि, इन सैनिकों का काम फिलहाल सऊदी की सीमाओं और जरूरी ठिकानों की सुरक्षा करना है. पाकिस्तान ने अभी अपने सैनिकों को यमन में लड़ाई के लिए भेजने का फैसला नहीं किया है.
सऊदी अरब का क्या है प्लान?
रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए दो विकल्पों पर विचार कर रहा है. पहला विकल्प बाब-अल-मंदेब के आसपास के तटीय इलाकों को हूतियों से वापस लेना है. दूसरा विकल्प यमन के कई इलाकों में एक साथ सैन्य कार्रवाई करना है. इनमें अल-बायदा, मारिब, ताइज और अल-जौफ जैसे इलाके शामिल हो सकते हैं.
इस ऑपरेशन की तारीख अभी तय नहीं है, लेकिन इसे आने वाले कुछ हफ्तों में शुरू किया जा सकता है. सऊदी अरब इस बार सीधे बड़े जमीनी अभियान में अपनी सेना उतारने के बजाय यमनी बलों को आगे रख सकता है. जमीन पर यमनी सैनिक कार्रवाई करेंगे और सऊदी सेना हवाई हमलों से उन्हें मदद देगी.
1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिक होंगे मैदान में
रिपोर्टों के मुताबिक, इस अभियान में 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को जुटाया जा सकता है. हालांकि, सैनिकों की संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि ऑपरेशन कितने बड़े स्तर पर किया जाता है. सऊदी अरब की कोशिश है कि स्थानीय यमनी बलों के जरिए हूतियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लिया जाए.
अमेरिका भी सऊदी अरब को खुफिया जानकारी और टारगेट से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करा रहा है. हालांकि, अमेरिका फिलहाल सीधे लड़ाई में शामिल होने के बजाय सऊदी की मदद सीमित रखने की कोशिश कर रहा है.
होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब पर संकट
इस पूरे मामले में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य सबसे अहम है. यह लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित है और एशिया, यूरोप तथा भूमध्य सागर के बीच समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है.
ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से ही आवाजाही प्रभावित है. ऐसे में बाब-अल-मंदेब पर हूतियों का बढ़ता नियंत्रण दुनिया के समुद्री व्यापार और ऊर्जा सप्लाई के लिए दूसरी बड़ी चिंता बन गया है.
सऊदी अरब का मानना है कि अगर हूतियों का दबदबा इस इलाके में बना रहा तो समुद्री आवाजाही के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी दबाव बढ़ेगा. इसी वजह से रियाद अब सैन्य विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है.
सऊदी अरब में 30-40 हजार पाकिस्तानी सैनिक
पाकिस्तान की भूमिका इस पूरे घटनाक्रम में इसलिए अहम हो गई है क्योंकि उसके 30 से 40 हजार सैनिक सऊदी अरब में तैनात हैं. पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, इन सैनिकों को सऊदी की जमीन और महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है. वे ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाव में भी मदद कर रहे हैं.
पाकिस्तान ने सऊदी अरब को सैन्य सामान भी उपलब्ध कराया है. पिछले महीने पाकिस्तान से चार कार्गो विमान अदन पहुंचे थे. इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, हल्की तोपें, ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम शामिल थे. पाकिस्तानी सैन्य सलाहकार भी सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर यमनी बलों की मदद कर रहे हैं.
हालांकि, पाकिस्तान ने अभी यह फैसला नहीं किया है कि उसके सैनिक यमन में जाकर सीधे हूतियों के खिलाफ लड़ेंगे. ऐसे में फिलहाल पाकिस्तानी सैनिकों की भूमिका सऊदी अरब की सुरक्षा तक सीमित बताई जा रही है.
सऊदी अरब के सामने बड़ी चुनौती
हूतियों के खिलाफ किसी बड़े जमीनी अभियान में सऊदी अरब के सामने सबसे बड़ी समस्या यमनी लड़ाकू गुटों की एकता है. यमन में हूतियों के खिलाफ लड़ने वाले सभी गुट एकजुट नहीं हैं. सऊदी अरब और UAE ने पहले अलग-अलग यमनी गुटों को हथियार और ट्रेनिंग दी थी, लेकिन उनके बीच भी मतभेद रहे हैं.
यमन मामलों के जानकार मोहम्मद अलबाशा के मुताबिक, हूतियों के खिलाफ लड़ने वाले कई गुट अभी ऐसे लंबे सैन्य अभियान के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं. दूसरी ओर, हूती कई मोर्चों पर दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं. ऐसे में सऊदी अरब के लिए यह अभियान आसान नहीं होगा.
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