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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही तत्काल बहाल करने की अपील …और पढ़ें
भारत ने की होर्मुज खोलने की अपील (फोटो-रॉयटर्स)
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते संकट के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मंच से एक सशक्त और भावुक अपील की है।
भारत ने अपने नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही को तत्काल बहाल करने का आग्रह किया है।
भारत का यह आह्वान केवल व्यापारिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन हजारों नाविकों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा हैं।
भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि महत्वपूर्ण जलमार्गों को बंद करने के किसी भी कथित कदम का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रतिनिधि, राजदूत योजना पटेल ने स्पष्ट किया कि समुद्री मार्ग केवल व्यापार के रास्ते नहीं, बल्कि वैश्विक समृद्धि के आधार स्तंभ हैं। उन्होंने हाल के हमलों में निर्दोष भारतीय नाविकों की जान जाने पर शोक व्यक्त करते हुए इसे ‘अस्वीकार्य’ बताया।
होर्मुज में जहाजों की आवाजाही में आई 95 प्रतिशत की भारी गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक स्वतंत्र और खुले समुद्री आदेश की वकालत की। अंतत:, यह संघर्ष केवल सीमाओं का नहीं, बल्कि मानवता और वैश्विक स्थिरता की रक्षा का प्रश्न बन गया है।
भारत दुनिया के शीर्ष तीन नाविक आपूर्ति करने वाले देशों में से एक है, जो वैश्विक कार्यबल का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा साझा करता है।
राजदूत पटेल ने चिंता जताते हुए कहा कि महत्वपूर्ण जलमार्गों को बंद करने या बाधित करने के प्रयासों का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और मानवीय आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है। उन्होंने जोर दिया कि जो नाविक समुद्र में फंसे हैं, वे किसी संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं। वे केवल दुनिया तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने वाले नागरिक कर्मी हैं। उनकी सुरक्षा हर कीमत पर सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध नौवहन बहाल करने का आह्वान किया और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक व्यापार और आर्थिक स्थिरता के लिए निर्बाध समुद्री आवागमन के महत्व पर जोर दिया।
एक बयान में उन्होंने कहा, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य से नौवहन के अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए। मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं – जलडमरूमध्य खोलें। जहाजों को गुजरने दें। कोई टोल नहीं। कोई भेदभाव नहीं। व्यापार फिर से शुरू होने दें। वैश्विक अर्थव्यवस्था को सांस लेने दें। सुरक्षित, निर्बाध आवागमन आर्थिक और मानवीय रूप से अनिवार्य है।’
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