Shubham Raja
Date: 22-09-26 17:28
Iran Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल की कीमतों के बीच ईरान ने एक बड़ा प्रस्ताव सामने रखा है. ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाता है, तो वह सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोल सकता है. यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है.
जापान की समाचार एजेंसी क्योडो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने यह जानकारी दी है. अधिकारी ने कहा कि ईरान बातचीत का रास्ता बंद नहीं करना चाहता, लेकिन अमेरिका को भी अपनी तरफ से ठोस कदम उठाने होंगे. ईरान का कहना है कि केवल बातचीत की बात करने से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि अमेरिका को जमीन पर अपनी गंभीरता दिखानी होगी.
ईरान ने ट्रंप के सामने रखी होर्मुज खोलने की शर्त
ईरान की मुख्य मांग है कि अमेरिका फारस की खाड़ी और उसके आसपास सैन्य दबाव कम करे. इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकेबंदी को हटाया जाए. ईरान का कहना है कि जब तक उस पर सैन्य कार्रवाई का खतरा बना रहेगा, तब तक बातचीत को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा.
ईरानी अधिकारी के मुताबिक, अगर अमेरिका अपनी तरफ से शुरुआती कदम उठाता है तो तेहरान एक सप्ताह के अंदर होर्मुज को दोबारा खोलने की दिशा में आगे बढ़ सकता है. ईरान ने यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है. इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हलचल देखने को मिली और तेल की कीमतों में गिरावट आई.
ईरान पहले भी कह चुका है कि अगर अमेरिका अपनी नाकेबंदी और सैन्य गतिविधियां खत्म करता है तो होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत खोला जा सकता है. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सितंबर में भी इस तरह का रुख सामने रखा था.
ट्रंप और पेजेशकियान की मुलाकात पर लगा ब्रेक
इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की संभावित मुलाकात पर भी नजरें थीं. हालांकि, ईरानी अधिकारियों के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच फिलहाल सीधी बैठक की कोई योजना नहीं है.
ईरान की टीम इस समय न्यूयॉर्क में है और उसके पास मध्यस्थों के जरिए बातचीत आगे बढ़ाने का अधिकार है. ईरान ने 16 सितंबर को भी अमेरिका तक युद्ध खत्म करने का प्रस्ताव पहुंचाया था. तेहरान का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बातचीत का रास्ता खुल सकता है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को पहले अपनी गंभीरता दिखानी होगी.
ऐसे में अब आगे की बातचीत अमेरिका के अगले कदम पर काफी हद तक निर्भर करती दिख रही है. अगर सैन्य दबाव कम करने और नाकेबंदी हटाने को लेकर कोई ठोस प्रगति होती है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का रास्ता बन सकता है.
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