12 किलो का दर्द और 15 साल की मुस्कान: SMS अस्पताल के डॉक्टरों ने झुंझुनूं की गुड़िया को दी नई जिंदगी – Live Hindustan

जब झुंझुनूं के सिंघाना की रहने वाली 15 साल की वो मासूम अपनी मां का हाथ पकड़कर जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के कॉरिडोर से गुजर रही थी, तो उसकी सांसें फूली हुई थीं। वो अपनी उम्र की बाकी लड़कियों की तरह चहक नहीं रही थी, बल्कि उसके कदमों में एक अजीब सा भारीपन था। उसका पेट इस कदर फूला हुआ था जैसे कोई गंभीर बीमारी उसे भीतर ही भीतर निगल रही हो। पिछले कई महीनों से न वो ढंग से खा पा रही थी, न सो पा रही थी। हर दिन उसका उठना-बैठना भी एक सजा बनता जा रहा था।

उसे और उसके गरीब परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि उस नन्हीं सी जान के पेट में कोई मामूली सूजन नहीं, बल्कि मौत बनकर पनप रहा 12 किलोग्राम का एक विशाल ट्यूमर था। लेकिन आज, SMS अस्पताल के सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की काबिलियत और एक मां की दुआओं ने मिलकर उस बच्ची को एक नया जीवनदान दे दिया है।

महीनों पहले जब इस परेशानी की शुरुआत हुई, तो परिवार को लगा कि शायद कोई साधारण पेट दर्द या गैस की समस्या होगी। लेकिन वक्त के साथ बच्ची का पेट लगातार फूलता गया। उसकी भूख मर गई, वह कमजोर होने लगी और हालत यह हो गई कि घर के छोटे-मोटे काम करना भी उसके लिए पहाड़ जैसा हो गया। एक 15 साल की किशोरी, जिसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी, वो असहनीय भारीपन और दर्द के साए में जीने को मजबूर थी। झुंझुनूं के स्थानीय डॉक्टरों से लेकर कई जगह दिखाने के बाद, जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो टूटती उम्मीदों के साथ परिवार उसे लेकर जयपुर के SMS अस्पताल पहुंचा।

अस्पताल के सर्जरी विभाग में जब जांचें हुईं, तो रिपोर्ट्स देखकर खुद डॉक्टर भी हैरान रह गए। ट्यूमर इतना बड़ा हो चुका था कि उसने बच्ची के पेट के लगभग पूरे हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया था। पेट के अंदर मौजूद बाकी नाजुक अंगों जैसे आंतें, लिवर और नसें पर इस भारी-भरकम गांठ का भयंकर दबाव था।

सर्जरी विभाग की मुखिया डॉ. ऋचा जैन के निर्देशन में जब इस केस को हाथ में लिया गया, तो यह सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं था, बल्कि डॉक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती थी। जरा सी चूक, और बच्ची की जान को खतरा हो सकता था। ट्यूमर को इस तरह निकालना था कि अंदरूनी अंगों को खरोंच तक न आए।

तय वक्त के अनुसार गुरुवार को इस जटिल ऑपरेशन की शुरुआत हुई। ऑपरेशन थिएटर के बाहर माता-पिता हाथ जोड़े ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे, और अंदर डॉक्टरों की टीम एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रही थी। डॉ. हनुमान खोजा के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने अपनी पूरी जान लगा दी। सहयोगी टीम में डॉ. फारुख खान, डॉ. दिनेश चंद शर्मा, डॉ. अक्षिता और एनेस्थीसिया के एक्सपर्ट डॉ. शैलेश ने मिलकर इस नामुमकिन से दिखने वाले काम को मुमकिन बनाया।

अत्यंत सावधानी और एडवांस सर्जिकल तकनीक का इस्तेमाल करते हुए, डॉक्टरों ने आखिरकार उस 12 किलो के भारी-भरकम ट्यूमर को बच्ची के शरीर से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

ऑपरेशन के बाद जब डॉक्टरों ने बाहर आकर परिवार को सफलता की खबर दी, तो मां-बाप के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी ने एक और राहत की खबर दी कि इस पूरे बेहद महंगे इलाज और सर्जरी का एक भी पैसा परिवार से नहीं लिया गया। मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत यह पूरा इलाज पूरी तरह निःशुल्क हुआ, जिससे इस गरीब परिवार पर आर्थिक तबाही का साया भी नहीं मंडराया।

आज वह 15 साल की किशोरी अस्पताल के बेड पर है, लेकिन उसके चेहरे पर अब वो पुराना दर्द नहीं, बल्कि एक सुकून भरी मुस्कान है। उसके पेट का वो भारीपन अब गायब हो चुका है। डॉक्टरों ने बताया कि अब वह सामान्य रूप से खाना खा पा रही है, उसकी आंतें बिल्कुल ठीक काम कर रही हैं और वह तेजी से रिकवर हो रही है।

SMS मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की यह कामयाबी सिर्फ एक मेडिकल अचीवमेंट नहीं है; यह कहानी है उस भरोसे की, जो आम आदमी को हमारे सरकारी डॉक्टरों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर है। यह कहानी है उस 15 साल की बच्ची की, जिसे डॉक्टरों ने 12 किलो के उस दर्द से आजाद कर दिया, जो उसे घुट-घुट कर जीने पर मजबूर कर रहा था। अब वो फिर से खुलकर हंसेगी, खेलेगी और अपनी जिंदगी की नई उड़ान भरेगी।

सचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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