12.2 मिलियन टन उत्पादन के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहा आईसीसी : सीएमडी – Hindustan

घाटशिला, संवाददाता। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) अनुपम मिश्रा ने इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स (आईसीसी) मऊभंडार के पुनरुद्धार, उत्पादन वृद्धि, नए संयंत्रों की स्थापना व रोजगार सृजन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी 12.2 मिलियन टन उत्पादन लक्ष्य (2030 तक) को लेकर आगे बढ़ रही है, जिसमें आईसीसी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह बातें उन्होंने गुरुवार को कंपनी के डायरेक्टर बंगलों में प्रेस वार्ता में कहीं। उन्होंने कहा कि आईसीसी के लंबे समय तक बंद रहने के कारण यहां रुके हुए कार्यों को दोबारा गति देना बड़ी चुनौती है। अन्य परियोजनाओं में चल रहे कार्यों को आगे बढ़ाना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन वर्षों से बंद पड़ी खदानों और संयंत्रों को दोबारा चालू करना काफी कठिन है। इसके बावजूद यहां के कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण को देखते हुए उन्हें विश्वास है कि कंपनी अपने लक्ष्य को अवश्य हासिल करेगी।
उन्होंने कहा कि केवल अंतिम लक्ष्य पर ध्यान देने के बजाय कंपनी ने बीच-बीच में इंटरमीडिएट माइलस्टोन तय किए हैं, ताकि हर छह महीने में प्रगति की समीक्षा की जा सके और जरूरत पड़ने पर रणनीति में बदलाव कर समयसीमा को कम किया जा सके। कंपनी की युवा तकनीकी टीम नई सोच और योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। सीएमडी ने बताया कि कॉपर उत्पादन की पूरी प्रक्रिया तीन चरणों पर आधारित है-माइनिंग, कॉन्सेंट्रेटर प्लांट और स्मेल्टर प्लांट। खदान से निकले अयस्क को पहले कॉन्सेंट्रेटर प्लांट में प्रोसेस कर कॉन्सेंट्रेट बनाया जाता है, जिसके बाद स्मेल्टर प्लांट में उसका अंतिम प्रसंस्करण होता है। इसलिए इन तीनों इकाइयों की क्षमता का संतुलन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा स्मेल्टर प्लांट आकार में छोटा है और वर्तमान समय में आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं माना जा सकता। इसलिए कंपनी की प्राथमिकता पहले खनन उत्पादन बढ़ाना और उसके अनुरूप एक नया एवं आधुनिक कॉन्सेंट्रेटर प्लांट स्थापित करना है। जब खनन और कॉन्सेंट्रेटर की क्षमता पर्याप्त स्तर पर पहुंच जाएगी, तब बड़े और आधुनिक स्मेल्टर प्लांट की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। यह कंपनी की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है। सीएमडी ने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी अपेक्षा रोजगार से है। नया कॉन्सेंट्रेटर प्लांट स्थापित होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि माइनिंग, कॉन्सेंट्रेटर और स्मेल्टर-तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सुरदा फेज टू कई वर्षों तक बंद रहने के कारण खदानों में पानी भर गया था, जिससे रेल ट्रैक, मशीनें और भूमिगत संरचनाओं में जंग लग गई। वर्तमान में पानी निकालने, ट्रैक बदलने और क्षतिग्रस्त ढांचे की मरम्मत का कार्य तेजी से किया जा रहा है। लीज मिलने के बाद पुराने ठेके को पुनर्जीवित कर कार्य शुरू कराया गया है तथा हाल में आई कुछ तकनीकी समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया भी जारी है।
सीएमडी ने कहा कि जिस दिन परियोजना का कार्य पूरी तरह शुरू होगा, उसके बाद उत्पादन को निर्धारित स्तर तक पहुंचने में लगभग तीन वर्ष का समय लगेगा। कंपनी सरकार की नीतियों के अनुरूप सभी आवश्यक अनुमतियां लेकर आगे बढ़ रही है। स्मेल्टर परियोजना को लेकर पर्यावरण संबंधी रिपोर्ट और संबंधित एजेंसियों की अनुशंसाओं के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। मौके पर आईसीसी के ईकाई प्रमुख उमेश सिंह, डायरेक्टर ऑफ माइंस घनश्याम दास गुप्ता समेत कई अधिकारी मौजूद थे।
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