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दिवंगत बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियन की मौत के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. दिशा के पिता सतीश सालियन की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार और जांच अधिकारियों को कई गड़बड़ियों को लेकर जमकर फटकार लगाई.
याचिका में पिता ने अपनी बेटी के साथ गैंगरेप और हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस की कार्यशैली पर ऐसे तीखे सवाल खड़े किए, जिसने पूरी जांच प्रक्रिया पर कई गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं.
मेडिकल रिपोर्ट पर कोर्ट के तीखे सवाल
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की बेंच ने मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर कई बुनियादी और गहरे सवाल पूछे. कोर्ट ने 14 फ्लोर की ऊंचाई से गिरने की पूरी घटना पर संदेह जताते हुए कहा कि अगर दिशा सचमुच इतनी ऊंचाई से सीधे मुंह के बल गिरी थीं, तो उनके चेहरे पर एक भी फ्रैक्चर क्यों नहीं था? इतना ही नहीं, उनकी नाक या चेहरे के अन्य हिस्सों से खून क्यों नहीं निकला? अदालत ने सवाल उठाया कि क्या यह वैज्ञानिक रूप से संभव है कि इतनी तेज गिरावट के बाद शरीर को कोई बड़ा नुकसान न पहुंचे और केवल दांत ही टूटें? इसके साथ ही कोर्ट ने पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से जुड़ी जानकारी खुद देना पुलिस की मुख्य जिम्मेदारी थी, जिसे निभाने में वे पूरी तरह नाकाम रहे.
पिता और मां के बयानों का ब्यौरा
मामले की सुनवाई के दौरान स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर शिशिर हिरे ने कोर्ट के सामने मुख्य गवाहों के बयानों का ब्यौरा रखा. उन्होंने बताया कि जनवरी 2024 में दर्ज कराए गए बयान में दिशा के पिता ने आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या की आशंका जताई थी. जब उनसे कुछ हाई-प्रोफाइल नेताओं और मशहूर हस्तियों के साथ कथित संबंधों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ किया कि वे उन लोगों को सिर्फ सार्वजनिक हस्तियों के रूप में जानते थे. उनका न तो उनसे कोई व्यक्तिगत संपर्क था और न ही उन्हें इस बात की जानकारी थी कि दिशा उनके संपर्क में थीं. दिशा की मां वसंती सालियन ने भी पुलिस को दिए अपने बयान में इसी बात को दोहराया था.
बॉयफ्रेंड रोहन राय का बयान
इसके बाद अभियोजन पक्ष ने दिशा के बॉयफ्रेंड रोहन राय के बयान का हवाला देते हुए घटना के ठीक पहले की टाइमलाइन पेश की. रोहन के मुताबिक, दिशा उस वक्त काफी मानसिक तनाव में थीं और उन्होंने शराब पी रखी थी. अपने पिता से हुई अनबन के बाद वे रोहन के साथ रहने आई थीं. हालांकि अभियोजन पक्ष ने अदालत में खून में अल्कोहल की सटीक मात्रा का खुलासा नहीं किया, लेकिन आधिकारिक रिपोर्ट के हवाले से कहा कि डॉ. जाधव द्वारा किए गए पोस्टमार्टम में यौन उत्पीड़न का कोई सबूत नहीं मिला है. इन्हीं तर्कों के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अदालत से इस याचिका को खारिज करने की मांग की.
आदित्य ठाकरे के वकील की तीखी बहस
दूसरी तरफ, नेता आदित्य ठाकरे का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील सुदीप पसबोला ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए जोरदार बहस की. उन्होंने कहा कि पूरी कार्यवाही महज सुनी-सुनाई बातों, सोशल मीडिया की अफवाहों और राजनीतिक दुश्मनी पर टिकी हुई है, इसका किसी ठोस तथ्य से कोई लेना-देना नहीं है.
पसबोला ने कोर्ट को बताया कि शुरुआत में जब रशीद खान पठान ने शिकायत दर्ज कराई थी, तब दिशा के परिवार ने कोई शक नहीं जताया था. बाद में सनसनीखेज खबरों और कुछ राजनेताओं व पत्रकारों के बयानों के चलते बेवजह का विवाद खड़ा किया गया. वकील पसबोला ने अदालत के सामने जोर देकर कहा, ‘हमें दिशा के पिता के दुख से पूरी सहानुभूति है, लेकिन एक दुखद मौत का राजनीतिक फायदा उठाने का यह सिलसिला अब बंद होना चाहिए.’
उन्होंने कहा कि परिवार ने शुरुआत में कभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मांग नहीं की थी और न ही उन्हें मौत की वजह पर कोई संदेह था, क्योंकि उन्हें पूरी घटना की सच्चाई पता थी. जब कोर्ट ने याद दिलाया कि औपचारिक मांग के बिना भी रिपोर्ट देना पुलिस का फर्ज था, तो पसबोला ने तर्क दिया कि परिवार की शुरुआती खामोशी ही यह साबित करती है कि मौजूदा आरोप पूरी तरह से बनावटी हैं.
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